धूप की लहरें | Dhoop Ki Lahren

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutGopikrishn Gopesh
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
300 MB
कुल पष्ठ :
118
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about गोपीकृष्ण गोपेश - Gopikrishn Gopesh
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)न बाग्देवी भारती! के मन्दिर में प्रविष्ट हों चुका हूँ । मेरे शूष
की लहर मेरौ वन्दना क स्वर-स्वर दोहरा रही हैं, में अनुभवकरता हूँ !रात्रि का अन्धकार, 'सुबह का धृथलापनः, ओर “দুদ কী लहर'
किसी भी , 'मन्दः कवि यश्ञः प्रार्थी के जीवन की तीन निश्चित धाराय
हैं, में सोचता ।गुलाब की निधि फल भौ द, कोटे भी । पथिक, यदि, पलों क
सौन्दर्य और उनकी सुवास पर मुग्ध होता है तो वह कटिं कौ तीदणताक। अनुभव भी सुदूर तक करता है !बस !गोपीकृष्ण
User Reviews
No Reviews | Add Yours...