भक्तिसागर ग्रन्थ | Bhaktisagar Granth

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श्रीत्रआाविहा रिणेनमः । अथ श्रीस्वामीचरणदासजीका-ग्रेथसंग्रह । ¢ € ब्रजचारनत्रव॒णन | পিট স্টিল লতি दोदा-दीनानाथ अनाथ कीः विनती यह सुनि উদ ॥ | ममदिरय में आयके, त्न कथा হি | चारि वेदं तमक रट, शिव शारदा गणेश ॥ ओर न शीश नवायहँ, श्रीकृष्ण करो उपदेश ॥ के गुरु के गोविन्द के, भक्ती के हरिदास॥ : सवहँनकी एके गिनो, जेसे पुहुप अरु वास ॥ नारदसुनि अरुब्यासजू , कृषा करिय इयाङ ॥ अक्षर भूढों जो कहीं; कहो मोहि ततकालछ ॥ शरीशुकदेव दयाल गुरु, मम मस्तक पर इश ॥ ब्रजर्चरित्र में कहत हों, तुमाह नवाय शारा ॥ सवसाधुन परणामकरि, कर जोरों शेर नाय ॥




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