आलोचना | Aalochana

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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॥ साधारणीकरण १ सवीन प्रेम छ श ही भनलनति दं ।* श्रएने लौकिक (एष्णएणन्श) न्य गत प्रयोनतों की परिधि ॐ को श्रत्तिकिमित कप्त म श्रमं दते है1 किक श्रपने बलया झादर्श (इफप्म्स्पूडु: 0 भनम्‌) रूप में उनकी चित्तभूमिरयों का पएक्तान मिलन दो दाता दे नहीं वे विश्यात्मा से ामियता प्राप्त कर लेते हैं । यही श्ववस्था साधारशीकरण बी श्रमीद दशा है । य्तमान कविता मैं बौद्धिकता के विस्फोट ठे दशक होकर श्रनेक सामारणी दत्य मे णद चदे दोने लगा है। सेवन, यद स्वान बस्ते काष्ठ हं हि प्रसेक भवना के साम कोई से बोई स्रागात्मरू घसार श्रवरय सलम्न रता ह तया उ विचार से श्रभिर सेने पर एम्ब ध्भाव देत निश्चप दी जापर हो जाता ।* झतएव, चौद्धिफता का जितना हो श्वनिश्यतापूखं पल्लन ऋषिता में क्यों न दो, यदि वह बदिता मी पारधघि में परि गणित दोने योग्य रोगै, तो उत््े कोई “मावमूतिः ध प्श्य यिपो रोगो, वदी खदन्य एाटक्फो श्राकग करेगी श्रौर उनो माध्यम से स्ति ष्ट्व प्रमाता, नेन फौ श्रुभूतिर्यो फा पाघास्णी कपण तन्मन होगा | पम है, सम्पति हम रथास्गर क प्रेचयान्तरसभ्ररकशचन्यता' मे विश्वास नकर, मित थर दूतस प्रात होगो। द, वरदो पर यह कह देना श्च।वश्यक प्रतीत ्ैता हि ग्रयोग्रादी कुद्कयिनान्नोका साधारणोकरण कदाचित्‌ कमी सम्मदनदो सप्ते क्याकरिरेते कबिलद केक्ेर मैं दी नहीं, श्रपितु सौ दर्य श्रयवा भाव के क्षेप में भी श्रत प्रयोग फरने के लिट लालायिग दो उठते दै। निम्न पक्तिया काश्यः श्रवा सी दर्य” निश्चय हू क्वि की व्यक्तिगत सम्पत्ति मान रइ जायगा (१9 भनिकनतर चेसती हुई चत, दमे निवेद मूर्र्सिचित खत्तिहा के चुरा में तीन डॉरगों पर जड़ा यतप्रीय धेयं घन गदहदा ।” (२) सरग धा इपर, नीच षादाज्तिया। प्रपचयके मारे यदुत पुरा दालथा, दिल दिमाग यख का, खदुर क स्वल धा 1 मानों कप कान्प के चिराचरित कोमल, उदात एव शालीन भ्य्वदारसेङष्रगयादै श्रथवा उट धरातले दक उठने वी श्रपनी श्रम्या तर्क थद््मता का श्रमुभव करड़े मीचे वे सल देश में ही श्रपना मसनवदलाय कर रहा दै । श्रोत्‌, व स्पय नहीं चाइता कि उसबी धारशाएँ सा्जनीन स्वीकृति प्राण करें । व्यक्तित्व के एक विशिष्ट स्तर पर दी, सात्विकता के एफ विशिष्ट उद्वोक के फचस्वरूप ही कपि उस रपहणीय 'मधुमती भूमिका” को उपलब्ध कर सकता दे । १ (ए ०पत्रलः ९ [ण्पहल 12पा, फ शाप इकाइ€ एएक59४5 0 15 1८५८ 1.९1 096 पा धाडा 00वें शा टक्कर फि घटा प्र बह [022 घ04 20८ १ एषा फोट फाणाटा एव जुएवड्रटप्पडप बाएते (000: फफदिजिणा, एछाए हुक 25 ०06 एताः १13६ ० पत कएल धयत्‌ ग पणा फणप्ट्णाः छट श्त 96 उल छल उणड्ाल पट्‌ --0 (ण्ट एण्ट्य्म पा], एला€6, ए६ पणय सनद १० लाप्प्यण १८३१८ 2 चपठणट्ो कणत प ददठपा०ठठ] पलत पपलो व ददतत, प्तय ए€ त ज पाल एष्टा एए पी प्व ठ फौत स्लवतला ~ व कवरदवादणण्य वण




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