व्यावसाथिक शिक्षा के प्राराम्भिक सिद्धान्त | Vyavasayik Siksha Ke Prarambhik Siddhant

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
351
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)९)
रुचि नही थी । हैनरी फोर्ड ने ्रपनी सचि से मोटर का उद्योग प्रारम्म कयि श्रौर्द्ष
व्यवसाय में उसे जो सफलता मिली है उससे श्राज विश्व मलों प्रकार परिचित है।यदि वह श्रपना पदक व्यवसाय ही करता तो समवत उसे सफलता नहीं मिलती भोर
९->2~>९~>९~>९ “>~ म न वद् इतना धनी हौ हो पाता । इस५ व्यापार की स्थापना में सम्बन्ध में हमे यह यहीं भूलता चाहिये
विचारसीय तत्व कि श्रपनी रुचि के व्यवसाप मे धोखा भी१ व्यापारका चुनावः ५ हो सकता है । कभी-कभी ऐसा होता है
(शर) व्यक्तिगत रुचि । कि किसी कार्य को ऊपरी शोभा से मोहित(ब) योग्यता ८ होकर हम उसे करने लगते हैं किन्तु बाद(स) उपलब्ध क्षेत्र । में पताते हैं । इसके विपरीत, यह भीहद) पूजन को मात्रा + सभव है कि श्रजानता के कारण किसी२. प्रारम्मिक श्रनुसन्धान या 0 कार्य में हमारी भ्दथि हो। ऐसा भी
प्रवर्तत । देखा गया है कि एक व्यक्ति भ्रष्विका
ब्यावसाधिक संगठन का कार्य प्रारम्भ करता है परन्तु धीरे-धोरे वह
स्वरूपः उसको खममने लगता है तथा कुछ समय(मर) एकाको व्यापार । बाद उसमे उसकी रुचि पदा हो जाती है ।(व) साकेदारी का व्यापार । (ब) पोष्यता--व्यक्तिपत रुचि के(ए) कम्पनी फा च्यापार । बाद दूसरा घटक है योग्यता (0581५) ।(ड) सहकारो व्यापार 1 विना व्यावसायिक योग्यता के हम किसी
व्यवसाय प्रारम्भ करने को । भो कार्यं को सफलतापूर्वक नहीं करश्रता लेना 1 सकते । योग्यता पेूक हो सकती हैं श्रथवा
पुजी का एकप्रीकरण । श्नुमव एवं शिक्षा से भी इसे प्राप्त
ब्यवसाय का स्थान किया जा सकता है । पंतृक योग्यता पर
(प) कच्चे माल की सुलमता । ५ तो हमारा कोई वश नदी होता! भ्रनुमव
(भा) सस्ती दक्ति की छुलमता । टे धीरे-धीरे प्राप्त होता है। हाँ, शिक्षा(ध) रन ( ही भ्रवश्य योग्यता प्राप्त करने का एक उचित
उचित
(ई) यातापाद एव सदेशबाहुन साधन है।को सुविधाएं । का
(उ) भनूकूल ललवायू 1 (ष) उपलब्ध केत्--्यापार के
(@) भविक मामि । ५ चुनाव के सम्बन्ध में निर्णय करते समय
७. कर्मचारियों फा चुनाव । ग्यक्तियत रुचि भोर योग्यता के अतिरिक्त
४ ८. कार्यालय की सामप्री । 9 अ ति
\ < राजकीय नोति। मी ध्यान रखना चाहिये । कुछ ब्यापारिक
५२.२.०९ ~> ->९ ~ केके मे बडी तीखी भ्तियों गिता रहती है ।
अत वहाँ लये व्यापारी के लिये पर टिकाता बडे साहस का काम होता है । इसलिये
्यापार में अवेश करने वाले व्यक्ति को ऐसा व्यापार चुनना चाहिये, जिसमें बम थेदीहि कि व, व > ९ ९ ->९ ~>ए.
< % ॥।
2
User Reviews
No Reviews | Add Yours...