भारत की साम्पत्तिक अवस्था | Bharat Ki Saampttik Awastha

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Bharat Ki Saampttik Awastha by प्रो. राधाकृष्ण झा - Prof. Radhakrishna Jha

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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दृह तान १8 १४ १६ {2 २8 2 १० द 1८ ९१ १६ 2 २ ११८ पु १४9 २2 १ १8 १५५ १६ 4 1. |) दय ११ ५६ 1५ 2८9 9 १८६ य्‌ ४० चय य ४२४ २५ ४६० 2, ४६४१ १3 ४४१ १६ ४८६ च शादपत्र सालाना सल्यऐ गादू १११६-१४ परिये | मार्यार थी गाः मद्याय । 1६, 1.. [४ पिनिम जोषि । प्पे फी जगद शर घर । पपिलास की जगद ५फिणम्‌' । [कीर्त्‌ वौ अगा | 1' 1; 1141 | 11171731 पुना कौ जवाः [१५५८० । (नप कौ जत्‌ (रवरनाप् | (मिन 0तान् को जण (रायो | ने रि फी जगः पानी ?। ५५१ हरा दानि । भए कौ जगह ५॥' + | २ फी जगा ।९५॥ | (11. ./1,9.-8..2.../.4 अष्वसादता कौ जगह शषसा | ऊनी भी पी जगाः उनी मि । ०४८०६ पदि । 3०१ पढ़िये । (पतणताएा। पढ़िये | (१00 पढ़िये । ११०५५) कण) पट़िये । रिणा कौ जगद्‌ 1१0, (णा, दिकण




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