भगवान्नामसागर | Bhagwannamsagar

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
7 MB
कुल पष्ठ :
180
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)भरगवायापसागर ।पट. पीठ, पादा, विष्टर ७ क थे
झाहूबेर ( हाउबर) ना ०अश्वत्थफा,
घ्वांत्ननाशिनी, छीहहंत्री, मत्स्यगंधा, वि
षध्नी, विसा, ह एषा, हनुपा हार €
झाज्ञा ना० आयसु,आदेश, आज्ञा, निदेश
शासन, शास्ति, शिष्टि 9
ाज्ञाकारी ना ० आश्राव, अज्ञाकारी
बचनग्र, ही ,बचनेस्थित,वि पेय , विनयग्राही हू
इच्छा ( चा ) ना० अभिलाष, अ-
मिलास, आकांक्षा, इच्ड़ा, इप्सा, इहा,
कांक्ता, काम;,कामना,तपे,तद् ,तुषा,दोहद, |
दोहल, मनोरथ,लिप्सा, वाड् स्पृहा १८
इतर ( तर ) ना इत्, इत्र, चण, |
वासयाग ५
इनरायन ना ० इनराइन,इन्द्रुवा,इन्ट्रन |
वासुणी,इन्द्रायण, ऐन्द्री,गवाच्ती ,गवाद्ने,
चित्रा, महाफला, मुंगादना, मृगाक्ती, मृगे
वाह, वारुणी वि शला, खेतपुप्पा १५
इन्द्र ना ०अप्सरानाथ,अप्सरापति,अम-
रपति,अमराधघिक, अमराधिप,अमरापति,
अमरेश, आखरडल,अआखरडलपाति, आ |
खणइलराजा, इन्द्र, ऐरावतिपति, को-
शिक, मीरवारेश, गोत्रभिद् , जम्मनेदी) |॥|| हो ते (=गोमयमघवान्, मरुत्वान् ; मरुत्सखा, मात-
। लिप्त, मेघवाहन, रिपुपाक; लपपम,{२१वज्धर्. वजी,बासव,वाप्तोष्यति, त्रिवातीबवजधेश, हृद्धश्रवावषत्रत, बुषा, वृत्रहा,
शक्त,शक्ताद्ध ,श ची पाति ,शतक्रतु,शतमन्यु,
शुनाशीर, सदन, सतमान, सहसहग,
सहसूश,सरपति,सुरभूप, सनासीर,स श
सन्नामा, सूत्रामा, स्वर्गदा स्वराट स्तर; राज,
दय, हरि, हरिवाहन, हरी ८२...१--नेत्र नामोके प्रथम सहस् अथक
शब्द लगनित्त और अप्सरा,इन्द्राणी, दिन
और देवता नामोंपर पति अथ के शब्द¢ 9: क = = = सरे के
लगान भे इन्द्रक नाम हाते हं जप्त हस्नयन,;अप्सरानाथ,सुरवश्यापति,शचीपति;। अहेति, दिवस्पति, सुरपति आदि२--इन्द्रनामों पर अख और घनुपअथ के शब्द ठगाने से इन्द्रधनुषकरेनाम
है नेप इन्द्रधनुष, शक्रास आदिइन्द्रजाल ना० इन्द्रनाल, माया,शावरी
साम्बरी ४इन्द्रनाल्ली ना ० इन्द्रनालिक,इदनाली,
प्रतिहार, प्रातिहार, मातिहारक, प्रातिहा
रिक, माधाकार, मायाविक्, मायावीःमा-
यिन्. मायी {१जिष्णु, तुपपद्, तुधपाड, त॒राषाह)
दिवस्परतिःदिवापति, इश्चमन, दुश्च्यवन,
देवपते, देवराज, नमृनिपुदन, नमचिदरिरि,
पाकशासन, पाकारि, पुरन्दर) पुरत,
पुलोमनापत्ि, पृरोमनापती, पौलोमअ-
रे, पाचीनवरा, बास्तष्पाति, बिडाना, बि-
ठौना, भूध(मदमोचन, मथवन, मघवा,[नइन्द्रधनुष नार इन्द्रायुष,पुरदराज्ञःशक्रधनु` १-इदरनारमोपर अघ अर घनुप अथ
के शब्द लगाने से इन्द्र घनुषके नाम होते
हैं नसे इन्द्रचनुप,शक्रास्र आदि
इन्द्रपुष्पी ना० अश्निदिसा, अनन्ता,
इन्द्रपुप्पी,फदिनी विलय ;शक्त पुष्पिका हू
१-इद्रनामॉपर पुष्पी शब्द रूगानेसे इ०्टूप-५=1
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