श्रद्धा, ज्ञान और चरित्र | Shradha Gyan Aur Charitra
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
432
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)€ श्रद्धा, चान श्चार चरितघटना का वर्णन् किसी भूठ या भपिष्यत्त घटना के?
नुसार करना, जैसे यह कहना! कि “छाज अतिम
तीर्थक्षर महावीरजी का निर्वाण-दिवस है (फ्न््तु
वस्तुत महायीरजी ने श्राज से २५००० वपं म श्चधिक
पहल निर्माण प्राप्त किया था ()
(२ एक जाति या वर्ग या श्रेखी के भाय मे, जैंस कहना
“झात्मा परमात्मा रूप है यहाँ सारी श्रेणी का उल्लेस
हुछा है, न कि किसी खास व्यक्ति का !(३ किसी एक सास व्यक्ति थी श्पेक्षा, जैसे “रामप्रसाद
बहुत होशियार है |(४) एक पतार्थ के पर्याय की छपेक्षा से-द्रव्य की '्पेक्षा को
छोडकर । जैसे श्वर नट करनियः गया है-इम वाम्य
में यह स्पष्ट है कि घर चौ सामग्री (४८2) नष नहीं
वी गई है--क्यल उसरी पर्याय नष हो गयी है(५0) व्याकरण के भाव मे-जहाँ व्याकरण ओर कोप के
नियमा के श्चनुसार शब्दों क भाय लगाया जाय।
उदाहरण के रूप में यह् वाम्य लीजिय कि “सूरजपूर्व म उगता है ' इस में “सूरज” साधारण भाव में
उयवहृत डुआ है ।(६ अलक्चर या सास भाव में जैसे--कि 'सुर्य देवताओं में
श्रमणी है । यहाँ 'सूय केवल ज्ञान का चिन्ह है शौर
'देवता” एक झुद्धात्मा के श्यात्मिक गुणों के द्योततक हैं ।
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