हिंदी भाषा और नागरी लिपि का विकास | Hindi Bhasha Aur Nagari lipi ka Vikas

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Hindi Bhasha Aur Nagari lipi ka Vikas  by बाल गोविन्द मिश्र - Baal Govind Mishra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श७ (ग)) अर मास--एव) अलुक्‌ समास--(ड) नित्य समास -(च् कमघारय समास--(छ) ६ियु समास--(ज) दन्द्र समास--(क) इतरेतर द्वन्द्--(ख) समाहार द्न्द्-- (ग) वैकल्पिक द्वन्द्--(४) बहुन्नीहिं_समास--(क) व्यधि- करण बहुब्रीहि--(ख) सम्रनाधिकरण बहुन्नीहि | ११--ग्यारहवाँ मदर दायर लिप की उत्पत्ति और विकास ९ सिंधघु-बादी सभ्यता की प्राचीन भारतीय लेपियाँ--ब्राह्मी और खरोष्ठी--वैदिक युग में लेखनकला के प्रचलन के प्रमाणु--परवर्ती युग में लेखनकला के प्रचलन के प्रमाण--इस संबंध में विदेशी प्रमाण-- प्राचीन लिपि-वद्ध ग्रन्थ न मिलने के कारण--ब्राह्मी लिपि की उत्पत्ति---ब्राह्मी लिंपि का किसी विदेशी लिपि से बिक स--(१) _ ओक-लिपि से ब्राह्मी का उद्मव--(२) सामी लिपि से ब्राह्मी का उद्मव--(क) दक्षिणी सामी से ब्राह्मी का विकास---- (ख) उत्तरी सामा से ब्राह्मी पिन वेकास--(ग) फोनेशियन लिपि से ब्राह्मी का लिपि की वैदिक उत्पत्ति लिपि का विकास--मौय-युगीन ब्राह्मी--गुप्तजाझी लिपि--न्यूनकोणीप लिपि--प्राचीन शारदा, नागरी श्र कुट्लि लिपियाँ--शारदा से विकसित काश्मीरी, ट्री लगण्डा श्रादि लिपियाँ--बंगला लिपि--बंगला से विक- . संत अन्य लिपियाँ--देवनागरी पल पे--देवनागरी विकसित लिपियाँ--देवनागरी लिपि -की पिशेषताएँ दा देवनागरी की त्रुटियाँ--देवनागरी लिपि में सुधर ।+* 3२५७ परिशिष्ट--सद्दायक




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