समाजशास्त्र विवेचना और परिप्रेक्ष्य | Samajshastra Vivechana Our Pariprekshya

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Samajshastra Vivechana Our Pariprekshya by राम आहूजा - Ram Ahuja

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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4 सपराजशास् -- एक परिचय व्याख्या कौ है। वेवर्‌ मै इसका विचा एक प्रकार कौ मस्थाकेस्पमेकियारै जिसके विपय में लोग जातते तो हैं किन्‍नु उसे दस्तावेजों से तथा वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं कर सकते। कूले (0७०८४) ने समझ को सहानुभूनिपूर्ण आत्मनिरीक्षण ([710570०७०॥) कहा है! एक समाजशास्त्री अपने विषय को इस प्रकार जान पाएगे कि याद में वे जब भी चाहेगे, अपनी पूर्ण क्षमता के साथ याद कर सकेग व उसका चर्णन कर सकेंगे। इस प्रकार ये इसे हसेशा आत्मनिरीक्षण द्वारा समझ सकेगे। ज्ञान व समझ के बीच का अन्तर उतना ही बड़ा हे जितना समाजशारत्र का एक विज्ञान तथा एक कला के रूप में हैं। इन अतिरिक्त विधिया का भी महत्वपूर्ण अन्तर्‌ है। एक वैज्ञानिक के रूप में समाजशास्त्री बा सबंध आपयारिक वैज्ञानिक अन्वेषण कौ किसी कसौटों से होता है। समाजशास्त्री विशेष रूप एमा अनुभव करते हैं कि उन्हें अपना आन्वेषण इस प्रकार करना चाहिए कि अन्य व्यक्ति भी उस प्रक्रिया फो बैसे ही दोहरा सके। दूसरे शब्दों मे यदि अध्ययन को दोहराया जाता है तो परिणाम एक समान ही होगे। उद्दाहरण के लिए मान लेते हैं कि समाजशास्त्री राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मादक दवाओं की प्रकृति तथा उनके दुष्परिणामों का अध्ययन करना चाहते हैं। सर्वप्रथम वै इम विपय मे संवधित सभी जानकारी तया आकडे एकत्र करेगे। वे एक प्रश्नावली बनाकर सामान्य विद्यार्थियों, होस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों, विशेषज्ञों, विद्यार्थियों के सबधियों तथा जित्हे उपयुक्त समझते हैं, ऐसे व्यक्तियों से जानकारी एकत्र करेगे। इसके उपरान्त उनका विश्लेषण करेंगे तथा अपने निष्कर्ष निकालेगे। अन्य समाजशास्त्री भी इसी प्रकार अध्ययन को दोहराकर सभवत; बहीं परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। इसके विपरीत कलाकार के रूप में समाजशास्बियों का सबंध तथ्यात्मक जानकारी तथा अनवेषण को दोहराने से कम होगा। नशीली दवाओं के दुष्प्रभाव का अध्ययन करने हेतु ये सहभागियों के अभिमतो, अनौपचारिक उपकरण तथा अन्य तकनीक का प्रयोग करेगे। फिर भी कलाकार के रूप में एक समाजशास्त्री वैज्ञानिक अन्वेषण के মিল্টন আন আট तं कणे! बाम्तव में सामाजिक जगत को पूर्ण रूप से समझने हेतु समाजशास्त्र एक कला व एक विज्ञान, इन दोतों परिप्रेक्ष्य की आवश्यकता हैं। समाजशास्त्री रॉबर्ट इस दृष्टिकोण से सहमत हैं। मफाजशास्त्र एक विज्ञाम के रूप में (508०७६५ ४५ $छ6७8९८) विज्ञान क्या हैं? क्या समाजशाम्त्र एक वितान हैं? ज्ञान प्रामि की तार्किक एव व्यवस्थित प्रक्रिया ही धिज्नान हैं। तिनान वह मानवीय ननि ह जं! अनुभवा (अथवा




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