उत्तर प्रदेश | Uttar Pradesh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ससूख्चना _.. . : हि, न.गिल नीचे की ओर विशाल चम्बल नदी मध्य भरत को पानी यमुना में उंडिल देती है । इटावा ओर जालंन हि सीमा पर. यमुना में दक्षिण की छोटी सिन्ध नदी मलती हे । हमीरपुर के पास यमुना आर बेतवा का पंगम है । हमीरपुर से इलादाच।द ( गंगा के संगम ' तक यपुना ठीक पूर्व की छोर चहती है । इन माग सें प्रद फतेहपुर .जिन्ते को बांदा से शर्मा करती है कुछ दूर तंक इनीहाव'द दर ८ वांद। के बीच में सीमा बनाती हैं । इसी माग में केन नदी यमुना मैं मिलती है | झ़न्त में यह इलाहाबाद शहर से प्रायः दो सील नीचे किले के पूव में गंगा से सिल जाती | किले से एक मील प्श्चिम की 'ोर यसना के ऊपर प्रान्त भर में सबसे झर्धिक सजयूत शौर विशाल पुल॒बना है । पुल के ऊपरी भाग में ईस्ट- इंडियन रेलवे की दृद्दरी लाइन है । वांडे शोर चाली ( पूर्वों ) लाइन ,से गाड़ियां कलकत्त की शोर जातीहे1 दाहिनी ( पश्चिसी ) 'ोर भी लाइन पए कलकतत 7से इंलाहाबाद के लिये रेलगाड़ियां श्याया करती हैं । निचले खंड के दृद्री पक्की सड़कें हैं । एक से सेटर 'चल्नते हैं ।. दूसरी बैल गाड़ियों आर पेद्ल जाने वालों के-लिग्र है । पुल से २ मील, पश्चिम की ओर सी ड्रोस है जहाँ पानी थें उतरने वाले हत्रई जहाज यमुना में उत्तरा करते हैं । नहरों के निकलने से 'छागरे के पास तक यमुना में ब्हुत कम पानी रहै । ... लेकिन चस्वल आदि दक्षिण से मध्य भारत की नदियों को पानी आ जाने से इलाहाचाद में सुना चड़ी शान-दार 'झार गम्सीर होती है। पुल के ऊपर से यमुना का.टृश्य सूर्योदय श्र सूयोस्त के समय बड़ा मनोहर लगता है । जहां तक गहरा जल ट्वे वतक-यसता में- छोटी: बड़ी -नावें बरावरः चला करतीद। उद्गम से गंगा संगम [इनाह्ावाद] तक यमुना की समस्त लम्बाई ८ढू० मीन है. | इस साय में इटावा तक यमुना गंगा के समानान्तर बढती है इसके आगे यमुना ्ौर गंगा के वीच का अन्तर कम होता जातान्त में इलाहाबाद में चद्द॒ गंगा से सिल.जाती .हैं। संगम के पास. यमुना का हरा नीला जज एकदम स्पष्ट दिखलाई देता हे कालिदास ओर तुलसीदास स का वड़ा रोचक चर्णन किया है ।उद्गम से ४० मीन की दूरी पर सलाक स्टेशन के पास चस्वईं बड़ेंदा सेय्ट्रल इंडिया रेलवे का पुल चम्बल के ऊपर बना है । चम्बल - [प्राचोन चर्मशावती] यमुना. की, एक प्रधान सहायक नदी है । यह इन्दोर राज्य में म्ढी छावनी से ६ :मील दक्षिण.पश्चिम की ओर जनपाओ पहाड़ी से २०१६ फर की उंचाई से निकलती है । विन्ध्याचल के उत्तरी ढालों से उतर कर उत्तर की श्ोर यह ग्वालियर, इन्दौर और सोतामऊ राज्यों में बढती हैं । कालाबार राज्य को छूती हुई चस्बल नदी ्पने उद्गम से १६५ सील की दूरी पर 'चॉरासी गढ़ गाँव के पास राजस्थान में प्रवेश करती है। सध्य सारत की सद्दायक सदयों में चंबला छौर सित्रा क्षिप्रा] प्रधान है । राजस्थान में पठार के कड़े किनारे को काटने में 'चस्वल का माग बड़ा संकुचित ब्ौर मोड़दार हो जाता हे । यहीं. भेसरोगढ़ के पास भामनी नदी चस्बल में मिलती है । इससे तीन मील छपर चम्बल में सुम्दर चूलीं या प्रपतत हू । एक प्रपात, की उंचाई ६० फुट है । यहां चस्बल में गुफाओं के. सीतर तीस चालीस फुट गहरे भंवर बस गये हूं । आगे उत्तर-पूव की ओर बहू कर चम्बल नदी वू:दी ब्ग्ौर कोट! के बीच में सीमा बनाती हैं । कोटा शहर 'के पास चम्घल एक चाड़ो और सन्दवाहिसी नदी बन . '. 'गई हैं | पानी के ऊपर बृरक्षों श्रोर ल्ताथों के एक दम ऊंचे उठे हुये किनारे बढ़े सुन्दर 'सालूम होते .. हूं | कोटा से आगे चम्बल में सेज और काली सिन नदियां आ मिलती हैं । जैपुर, कोटा तौर ग्वालियर फी सीमा के पास इस में पावंती नदी मिलती है । इसके. छागे चस्वल जैपुर, करोली और धौलपुर शाष्यों के वीच में सीमा चनाती हूं । जेपुर राज्य की बनास नदी चस्बल में 'सिलती . है । धौलपुर नगर के पास पहुँच कर चस्चल नदी ३०० गज चोड़ी हो जाती है | इसका पाती ऊचे किनारों से १०० फुर नीचे .बहता हूं। व्पों ऋतु में इसमें ७० फुर और कसी कसी १०० फुट ऊची बाढ़ आती है । उस समय इसकी चे़ाई १ सील हो जाती है। इसके किनारे भूत-:भुजैयों की तरह गहरे [६०] फुट अर चक्कृरदारनालों से करे हें । घोलपुर से ३ मील दुद्िस दी ओर:




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