किशोरी लाल भाई की जीवन - साधना | Kishorlal Bhai Ki Jeevan Sadhana

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नरहरि द्वा. परीख - Narahari Dwa. Parikh

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श्री बैजनाथ महोदय - Shri Baijnath Mahoday

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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म्‌ किधोरछारू भाईं की बौजन-साथता उपासना की पुष्टि तबा बहुत से शोगों के छमास (शोकसंग्रह) के दिषार से प्रबृत्ति घुकू कर दी। सबत्‌ १८५६ का श्लाबम बदी ६ का दिस स्मामी नारामण- सप्रदाय के सत्थमियाँ में बड़ा मसक्त दिगछ माना जाता है, क्योकि इसके गाव के तीस बर्ष सदजानर स्वामी ने मुबरत-काठियाबाड़ में ही बिताये मौर उडब सपरा (स्वामी शारापण-संप्रदाय का पारिमापिक साम) का पर्मगप बहत किया। एवामी नाय्यथ एडेश्थर की मन्ति दया उपदे कृषते और मंत्र यंत्र ठपा महल देव-देबियों से न डरने कौ बाद समझाते। उत्तके मे धम्द सीधे हम में उत्तर बाते रायक हई মী के प्रारश्प कम का उल्हंपत करके तो रद भैरव मंगासी अआवि देबी-पेशता जीग को मुख-बुदू देने जगना मारने-जिक्काले के छिए सर्द मी ई । हौ परमेस्वर मबप्य प्रार्य कमं और मृत्पु को मन्‍्यवा कर सकता है मौर मृतका को जिसा सकता है अपना जीमितां को भार सकठा है। दूसरे कौ देवी-इबता ऐसा नही कर सकते । इसप्रिए केबल एक परमेस्‍्दर का মানব फ़ेकर भजन-स्म रण करते रहता चाहिए और অন্ত किसी देवी-देववा कय भय नही ফালা अहिए। हम सब तो भगजास क॑ मक्त और पूरषौर है। इसडिय ছবিনকল के सन में ठो किसी प्शार का भम हो द्वी गह्टीं सकठा। जयर मत-जंत्र मे णपा আবি से कोई मनुष्प जीबित रह सकता तो पृष्वी पर ऐसा कौ तो होता । परलु ऐसा कोई दीलता नही । इसऊ भर्ताबा उस समय बर्म के साय पर भतेक अब-विस्दास तजा सती और বাহানা जैसी कुप्रमाएँ प्रचक्तित घी। पारिपों के समय तथा ছাল के हिमा पें दर्द बौत तबा झपदिादौन सैस-तमा्ं आएि भी प्रबद्धित बे। इन सब का क्र्यामीजी से सफ्सतापूर्षक बिराच किपा। उतती सबसे बड़ी डिसेपता यह थी डि पाप्मी मृसक्त्मान आदि जदििसू जातियां का भी उन्हाते अपब सप्ररयय पे पामित कर जपा! एनी प्रसार धूड यितौ जातवासौ कौर्मा को भी मंप्रशाय में लेफर उसी पासिेई उन्नति यै । स्वामी नागावप ढे मिप्पों में कडिया (शमे) इर्य বন্যা प्राया (बद्वा) सी दे (মাং) বশে দাধীযনয लाप बदुए बरी सस्या में थे। उनझा सुधार बे करते । मीक मिती यानवाम्मी आलिया कय झपर उड्कर उतेक अडर डेव सस्‍्तार शाखतो | उत्होने ड़ साथी




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