जीवन के तत्त्व और काव्य के सिध्दांत | Jeevan Ke Tatva Aur Kavya Ke Siddhant
श्रेणी : साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutLakshminarayan Sudhanshu
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
10 MB
कुल पष्ठ :
363
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about लक्ष्मीनारायण सुधांशु - Lakshminarayan Sudhanshu
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[ १३ ]
तीसरा अध्याय
आत्ममाव ओर काव्य-विधान[ आत्ममाव--एक अन्विति, ३८--आत्ममाव की अभिव्यक्तिकला,
३८--टाल्सठाय का कला-सम्बन्धी मत, ४०--समीक्षा, ४१--कलाकारों के
भेद और काव्य में निरूपित साव, ४३--आत्मभाव की प्रतिष्ठा और जीवन
की स्थिति, ४४--आत्मसाव की अनेकता, ४४--शक्ति और ज्ञान, ४६--
प्राचीन और नवीन छन््द, ४७--वेज्ञानिक सभ्यता और काव्य-विधान का
नवीन क्षेत्र, ४५--काव्य और जीवन का तारतम्य, ५०--विज्ञासबृत्ति और
काव्य-विधान, ५१--जीवन के सत्य में काव्य का समन्वय, ५३--कवि का
जीवन और काव्य-मर्यादा, ५८--आत्मसाव और काल की संकान्ति, ५६--
भाव और विचार में काल का व्यवधान, ५७--आत्ममाव और चरित्र के
সলিঅন্ত, ५८--संक्रान्तिकाल और काव्य, ५९--काव्य-विधान में मूलतत्त्व
का विश्लेषण, ६०---कलाकार की शैल्ली और उसका आत्ममाव, ६२ ]चौथा अध्याय
सन का ओज और रस[ मन का ओल और रसास्वादन, ६३--ओज का सश्य और आनन्दू-
प्राप्ति, ६४--संचित ओज और उसका उपयोग, ६६--आनन्द और विषाद्
तथा योज, ६७--भोज और स्थिति-परिवत्तेन, ६८--मन की स्थिति और
व्यवधान, ६९--मन का संस्कार और रस की प्रतीति, ६९--काव्य-वेचित्र्य
अथवा चमत्कार, ७०--रस की ग्रतीति में मनोरज्ञन--एक साधन, उद्देश्य
नहीं, ७१--रस-पद्धति मानसिक व्यायाम है, ७*--आननन््द और विषाद् का
रासायनिक सम्मिश्रण, ७४--काव्य में संकेत या उपेक्षा से ओज की रक्षा, ७६ |
User Reviews
No Reviews | Add Yours...