षङ्दर्शन-रहस्य | Shandarshan - Rahasya
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
10 MB
कुल पष्ठ :
380
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)विपय-सूचीभारतीय दर्शन भौर तप्व-शान--- [৪০৪০ ২২২৩]निरतिशय सुख या दुःख की निवृत्ति में कारण क्या है मोका
स्वरूप-मोक्ष का साधन --तत्त-विचार-्रात्मसाज्ञात्कार के
उपाय--पुनर्जन्म-विचार--सूइ्मशरीर की सुत्ता--प्रतोकोपासना--
उपाध्युपाशना--ब्रह्म सत्य, शान और श्रनन्त है--श्रनुमान का
झ्रनुमवकत्व--श्रुतियों की गूढा्थता से उत्पन्न संशय -प्रमाण के
विपय में मतभेद--प्रमाणों में परस्पर सम्बन्ध- प्रमाणों में था ध्य-बा घक-
माब--प्रमाणसाध्य प्रमेय--श्रात्मसाक्षात्कार का स्वरूप--रामानुजा-
चायं के मत में प्रमाण-गति--ब्रह्म में प्राण-गति : शाक्वर मत--श्रुति
और प्रत्यक्ष में अन्यता का ग्रारोप--शब्द-प्रमाण से श्रावण-प्रत्यक्ष का
भी बाघ--बाध्य-बाधक भाव में स्थूल विचार--ाध्य -आाधक भाव में सूक्ष्म
विचार--ताकिक दर्शनकार--साख्याचार्य का तकाग्रह--पातझल की
तार्किकता--नैयापिकों का तर्कग्रह--वैशेषिक भी तार्किक है --आ स्तिक
और नास्तिक--भौतों और तार्किकों में मूलमेद--(वेद के) पौ््पेयत्व
और अ्रपौरुषेयत्त का विचार--छत्ता फे मेद से श्रुति श्रौर
प्रत्यक्ष में श्रविरोष--प्रमेय-विचार--ईश्वर के विपय में चार्वाक-मत--
ईश्वर के विषय में मतान्तर--ईश्वर के विषय में नैयायिक आदि का
मत--ईश्वर के विषय में अ्रद्वेतववादियों का मत--ईश्वर-सचा में
प्रमाण--अ्रात्म-प्रत्यक्ष में भुति का पग्राधान्य--ईश्वर के विधय में भी
अनुमान से पूर्व शुति की प्रवृत्ति--जीव का स्वरूप--आत्मा वे कूटस्थ
नित्य द्वोने में श्राज्ेप--श्रात्मा का कूटस्थत्व-समर्थन--जीव के विधय में
अन्य मत--जीव-परिमाण--जीव का कु त्व-अ्रचिद्र्ग विचार--
शारम्म आदि वाद-विचार--स्याति-विचार--सत्ख्या तिवाद--श्र रूया ति-
बाद-- कार्यकारण में मेदामेद का विचार--जड़-वर्ग की सृष्टि का
प्रयोजन--इिद्रीयीं की मौतिकता--इ र््रियों का परिमाण--कर्मेस्द्रियों का
भौतिकर्व---मनत--शान--पदार्थ-विचार-- चार्वाक आदि के मत से
तत्व-विचार--रामानुजाचार्य के मत में तत्त--माध्य-मत से पदार्थ-
4 विवेचन--माहेश्वर थ्रादि के मत से ततत््व-विचार--श्र द्रेतमत से तत्त्व-
विचार--अन्घकार थ्रादि के विषय में मतसेद--वन्ध--प्रामास्यवाद--
मोस्--दर्शन-मेद में बोज--तत््वान्वेषय का उपयोग--तत्त्व-शञान से
मोक्ष-साघन --मारतीय दर्शनकार--दर्शन-वारतम्य-विचार--- था स्तिक-
User Reviews
Vikas Roshan
at 2021-05-30 13:06:52