महावंश | Mahavansh

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Mahavansh by भदन्त आनन्द कौसल्यायन - Bhadant Anand Kausalyayan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[ ६ ]नाम लाठ है। यह लाछ कोनसा जनपद हे? भी ऐयड्डर का कहना है, क्कि यदि महावंश की कथा में कुछ भी इतिहास स्वीकृत करना ही पड़े तो हमें लाछ को बहड्ढ का ही एक प्रदेश राढ़ स्त्रीकृत करना होगा | और महाबंश में জিন बन्दरगाहो के नाम आए हैं उन्हें ऋहीं न कहों बज्चाल की खाई । में ही दूंढना होगा, अरब समुद्र के तट पर तो किसी को भी नहीं ।यह तक बिल्कुल निस्‍्सार है। भरुकच्छ (मडोच) और सुप्पारक (सोपारा) स्पष्ट तौर पर नगत (प्राचीनलट) के बन्दर हैं। लाछ देश को विद्वानो' ने लाट “गुनतरात प्रदेरा स्त्रीकृत किया है। लेकिन श्री ऐयड्वर की ক্সায়া ই कि दानों को केवन इस लिए शअस्तोकार करना होगा क्‍योंकि वह कालिङ्ख के किस, प्ररेश को बच्च और उसके पड़ोसी राढ देश को लाछ बनाने के विचार का समथन नहाँ करते। वड्ढ के पड़ास में लाछ हूंढने को ब्रजाए लाहछ के पड़ोम में নজর क्‍यों न हूंढा जाए? और महावंरा में लाछ के বস ক पड़ोत में होने की कोई वात नहों ই। নক राजकन्या चूकि लाछ गई इस लिये वह पड़ोस में हो रहा होगा, यह काई तक नहीं। जातको की कथाओ' से साफ मालूम होता है, कि वशणिक-साथ उस वक्त दूर दूर तक घूमा करते ये |महावंश में जितनी भी घटनाओं का समय दिया गया है उन सब की गिनती बुद्ध के परिनिर्वाण से ही की गई है। विजय का लड्ढा-आगमन बुद्ध के परिनित्राण के दिन माना ही जाता है। बुद्ध का परिनिर्बाण कत्र हुआ ! सिंहल, स्थाम, वर्मा को परम्परा के अनुभार बुद्ध का परिनिर्वाण ५४४ ई० पू० में हुआ । क्‍या यद ढोक है !अशोक का राज्वाभिषेक बुद्ध के परिनिर्वाण के २१८वर्ष बाद बताया जाता है और लिखा दे कि यह राज्याभिषेक इस समय हुआ जब अशोक चार वर्ष तक र,ज्य कर चुका था। इस दिसाब से अशाक का राज्याग्म्म बुद्ध परिनि- बाण के २१४ वर्ष बाद हुआ । विन्दुसार ने २८ वर्ष राज्य किया । चन्द्रगुप्त ने २४ वष। दोनों के राज्य काल को जोड़ कर २१४ में से घटाने से चन्द्र गुप्त का राज्यारम्म ब॒द-7रिनिर्वाण के १६२ वर्ष बाद निश्चित होता है। भारतवष के प्राचोन इतिहास में जो थोड़ी सी निश्चित तिथियां हैं, उनमें एक है चन्द्र गुप्त के राज्य की तिथि। सिकन्दर के आक्रमण की दिथि निश्चित है, उसी के आधार पर चन्द्रगुप्त का राज्य ३२१ ई० पू० में माना जाता है। ३२१ ६० पू० + १६२ वर्ष -- ४८रे ई० प० में बुद्ध ढा परिनिर्वाण हुआ। बुद्ध




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