तथागत | Tathaagat

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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तथागत -ञुद्धोदन--ध म॑-प्रव तंक ! सचिव--तपस्वी, भिज्ञ ! ( प्रजावती का प्रवेश )प्रजावती--महर्पि, महषि ! यह कया कह रहे हैं आप ? माया का पुत्र ओर भिक्ु ! माया असूतिग॒ह में ही चल জী? তা ভুলकौण्डिन्य--( हँसते हुए ) रानी प्रजावती, मायारानी अकेली गई; किन्तु आप अकेली नहीं जायेंगी, एक पूरा महिला-समाज आपका अनुसरण करेगा। अच्छा, में चला महाराज !शुद्गोदन--यह आप र्या कहे जा रहे हैं महर्षि !कौण्डिन्य--जो लिखा हुआ है, वही । नमस्कार महामंत्री !२| प्रथम ऋखेट : कपिलवस्तु ॐ निकट की वनस्थली |उदय-मारिये तीर कुमार, वह. .....पिद्धाथ--वह्‌ ! किधर उदयौ!उदय--वह देखिये, वह एक मृग-छोना खड़ा है !पिडार्ब--कितनी बड़ी-बड़ी उसकी आँखें हैं. उदयी ! इतनी सुन्दर आँखें आदमी को क्यों नहीं दी गई' ?उदय--भाग जायगा कुमार, भाग ! जल्दी निशाना लीजिये ।पिद्धाथ--निशाना ? इसपर तीर ? उदयी) इच्छा होती ই,ठप




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