भारतीय वाङ्मय के अमर रत्न | Bhartiya Vadmay Ke Amar Ratna

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ग्रथम अध्याय मारत मे वाङ्मय क प्रथम विकास १ वेद न्न केक्त भारतवर्ष प्रत्युत संसार भर में पहले-फ्हल मनुष्य को प्रतिभा জিল নাজনঘা ন্ট रूप में पुष्पित हुई उल्तमें प्रमुख हमारा वेद है । वेद आज हमें संहिताओं अर्थात्‌ संकलनों के रूप में मिलता है । संहिताएँ महाभारत युद्ध के समकांलीन कृष्ण हपायन मुनि ने की थीं, जिस कारण उनका उपनाम वेद- ज्यास--अथोत्‌ वेदों कां वर्गीकरण करने वाला--हो गया। महा- भारत-युद्ध का समय हम अनेक प्रासाणिक विद्वानों का अनुसरण करते हुए-१४२४ ६० पू० मान सकते है । हमारी प्राचीन अनुश्रति -से पता चलता दै ¢ कृष्ण देपायन पले संहिताकार न थे; संहि- . বাই बनाने का काय उनसे प्रायः वीस पीढ़ी--लगभग साढ़े तीन - सो वरस--पहले से (अर्थात्‌ अंदाजन १७७५ ई० पू० से) शुरू हो : चुक्रा था | बेंदिक बाइसय त्रयी कहलाता है । उस গ্থী से ऋक्‌ পে পপ ५




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