हिन्दी नाटकों में हास्य और व्यंग्य | Hindi Natako Me Hasya Aur vayang

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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स्व चर का पच्छ संस्था ध्याय - भारतैन्दुकालीन नाटकों मैं हपस्यव्यंग्य ७४५ ११७० के कनमाककहकपावाहाकराउामाशाउणपा वाया शाणपापापशिवजाशाशपाशपापा मास रा पपाशर । पवस्था कै प्रति चास्यनव्यण्य शासन न्याय सामाजिक प्रष्टाघाए सदिराधान वैश्यागमन अन्धन लत क्त हास्थनव्यग्य भारतैन्दयगीम भ्म्द व्यग्यवार निष्कर्श | .. पंचम पंचीय नाटकों मैं रास्य भौर व्यंग्य शश१न १३४ वध अजववववसवववअजवव वध धवअवलाववअसावसलवअवअधलव अल अअध परिचय शास्यनव्यंस्य- प्रदसनीं मैं पस्य-रव्यंर्य जिंक बुराइयाँ का चित्रण मनी लिनीद हेतु चास्यनव्यग्य का फ्रयौग निष्कण | चिरौध मैं व्यंग्य का प्रयौग निष्कच । ६. सप्तम बध्याथ फ्सादीपयुकालीन साटवाी मैं सास्य और व्यंग्य १८२ ररह न रपरबपाावरगगवरपटापारगडरजागगहगगगगहम्पागडगशमरामागगमशशन परिस्थिति हास्य थिदुफ्ता न की ्पियलि फैशनपरस्त शि बैका ए स्वा्थी राज स्त्रियां रास्थय के नर भालम्बन निष्कच | ता भीर




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