बौद्ध संस्कृति का इतिहास | Bauddh Sanskriti Ka Itihas

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Bauddh Sanskriti Ka Itihas by भागचन्द्र जैन - Bhagchandra Jain

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(५) मंगेनान महावीर के माता-पिता भौ उन्ही अनुपायियों में से ये ।४ उत्तराष्ययन का केशी गौतम संवाद तो प्रसिद्ध ही है 1 अमबानु पाशवताथ भौर महावीर के वीच लगभग २४ ०वर्ष का झन्तर था । इस बोच ज॑न संघ में म्राचार रथिल्य घर कर गया । भंगंवान महावीर ने इसके भूल कार्या फे गम्मीरता पूर्वक विचार किया भौर प्राया कि मसवाद पास्यंनाथ ने वहिर्धा के भ्नन्तर्गत परिग्रह और छोसेवव इन दोनों का पश्वत्तर्भाव कर दिया है । महावीर ते उन दोनों को पृषर्ककर बरतो मे-भौर भी सपहता ला दी । दंत प्रकार महावीर के भरतुसार पश्चयाम हो गये ॥** अ. पाश्वताव के चातुर्धाभ और भ. महावीरके पंचयाम से पिंपिटक भो अ्रपरिचित नहीं रहा | भ बुद्ध के प्रश्तों के उत्तर में प्रसिवन्‍्धकंपुत्तगामरिण में कहा कि निगरटनातपुत चार प्रकारकेप्रापीः कौनिन्शा करै है--पीण प्रतिपतिति (प्राशिवध), भ्रदिननं श्रादियति (बौरय), कामेसु मिच्छाबरति (मंम) पौर भूसा भराति (भृषावाद)* । यहाँ ये चार प्रकार भूल से महावीरके कह दिये गये है । वस्तुतः हैं ये पःश्वेनाथ के | महावीर के भ्रनुसार पापाश्नव के पौव कारण ये है ।* १, पाणातिप्राति होति। २, प्राविन्‍्तादाबयी होति, ३, भन्नक्नवारी होति, ४. मुसाबादी होति, श्रौर ५, सु रामेरयमज्जप्पमादद्वायी होति। यहाँ गणना कै ग्रनुसार पाँच कारण ठोक हैं, परमसु क्रमहीनता के प्रति- रिक्त प्रिग्रह का हपष्ट उल्लेख नहीं हो सका । परिग्रह के स्थान पर घुरामेरम- मज्जप्पमाददूखान को स्थन दे दिया गया । दस उल्लेख से इतना तौ ष्ट हं हो किनबुद्ध चातुर्णाम भ्रौर पञ्चमाम इन दोनो प्रकार के धर्मों से परिचित थे | संभव है यह सब महावीर द्वारा किये गये परिवर्तन के श्रासपास से सम्बद्ध हो झौर भ्रधिक परिचय न होने के कारण यह भूल हुई हो । অথবা নত भी संभव है कि चूँकि जैन मद्य स्ांसादिक सेवन का अत्यन्त विरोध करते हैं इसलिए वही जातं संगायन करते समय स्पृति-पष मे बनी रहौ हौ \ २८, महावीरस्स प्रम्मा पियरो पासावच्रिज, आका. २, १५-१५ २६, उत्तरा, বা प्रध्ययन ३५, स्मवायांग, ५.२ ३१, संग्ुत्त, भाग ४ पृ ३१७-८ ३२. भुर, भाग ३, पृ, २७६-७




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