राज्य और नागरिक | rajya aur nagrik

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
rajya aur nagrik  by अज्ञात - Unknown

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about अज्ञात - Unknown

Add Infomation AboutUnknown

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
पहला अध्याय राज्य और नागरिक सुख की खोज-- हर एक आदमी सुख चाहता है | पुरुष हो या स्त्री, जवान होया वदा, सव की यह इच्छा रहती है कि हमारे जीवन में कोई तकलीफ न हो, हमारी कठिनाइयों दूर हों, हमें सुख मिले। आदसी के हरेक काम करने का उद्देश्य यही होता है कि उसका जीवन सुखी हो। किसी २ काम से उसे दुख भी मिलता है, पर इस काम को करते समय भी उसने सुख ही पाने की इच्छा की थी । घात यह दै क्रि आदमी का ज्ञान अपूर्णो है। वह भूल या अज्ञान से कुछ ऐसे काम कर बैठता है, जिस से उसे सुख न मिल कर दुख मिलता है, या जिस से पहले तो सुख मित्रता हुआ मालूम होता है, पर थोड़ी ही देर के बाद उसे ज्ञात हो जाता है कि उस काम से सुख पाने की आशा करना ठीक न था, वद्‌ काम तो दुख ही देने वाला है। निदान, आदमी को अपने कामो से सुख मिले या न मिले, इसमें कोड संदेह नहीं कि हरेक काम करते मे उसका उदेश्य यदी रहता द कि उसे सुख मिले, ओर अधिक सुख मिले ।




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now