अरधानासर कथा कोष | Aradhana Sar Kata Kosh

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
22 MB
कुल पष्ठ :
558
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)हि जकर्लक देव की कथा हुनछ- 1... दिकितने दिन बीते सुख लीन । फिर मंत्री उद्यम यह कीन॥ . !
सुत विवाह करनेा चितधार । आरम्भ कीनों विविध प्रकार ॥८0
इम लखकर दोनों सुत एह । बाले इम बच सुन्दर देह ॥_ झहा तात इह झाराभ सबे । किस कारन तुम कीनो अब ॥£॥
ऐसे बच सुन बोले तात । तुम विवाह करना अब दात ॥
फिर दोनो भाषे गुणवान। इस विवाहकर कया बुघवान ॥१०)
तुमने ता श्रीगुरु ढिंग कही । ब्रह्मचय घारो सुत सही ॥
तब हम घारो शील महान । तुम संदेह न चित में झान ॥१९॥दोहाऐसे बच सुन सुतन के, बोले तब इन तात 1क्रीड़ा करके शील की» माषीथी में बात ॥ १९ ॥. ,फिर दोनों यह चतुर अति: बोले मधुरी बान । नघर्म काजमें तातजी, कीड़ा केसी जान ॥ १९३ ॥
ं सयौपाई ।तब मंत्री बोलो इम बान । अहो पुत्र तुमहे! बुधिवान ।
_ में जो बूत दिलवाया सार । झष्ट दिननके नेम विचार ॥ १४ ॥।
. फिर दोनो बोले इम चइ । हमसे तुममरज़ाद नकही ।
. तुमने अरु श्रीगुरुन जोय। बृत दीनो हम पाले साय ॥ १५ ॥
इस भवमें विवाहकों नेम । शील बृत्त पाले घरप्रेम ।
ऐसो कह ग्रह कार ज त्याग । बौद्ध शास्त्र पढ़ियो बड़माग ॥ र६ ॥
मान्याखेट नगरमें सोय । बौद्ध तनो पाडित नहि कोय ।
तब विद्या जाननको संत । मूरखसिखवे चले तुरंत ॥ १७ ॥
चलत चलत यह पहुंच तहां । चोद्ध मतनके मठ जहां ।
| बंधक गुरु तहैँ है परधान । धमाचारज नाम कहान ॥ १८ ॥ .
। ताढिग तिष्टे यह जुग जाय । बोद्ध मार्ग जानन चित चाय ।1
प|||ककटिकजे
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फुकरनणा बयनिपलन न प कयदकपदरय सययनणनपनन्मय
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