साहित्य - प्रारम्भिका | Sahitya - praranbhika

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
124
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
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शिक्षा पाने के उपरान्त अपना जीवन भगवत भजन में अर्शि
फर दिया था, उससे भगवत गीता, अ्रध्यत्म रामायग
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ग्राज्ञाते हैं ।उसके पर्दों में लोगों दो तथा गाने वाने को खूब रस तथा
परेरा मिली, एव कारणत लोक विय हो गया था । उसकी
शेतरी बहुत ही प्रिय तथा शान-पूर्ण है और वह भगवान म
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