श्रीमद भगवती सूत्रम् पार्ट - ६ | Shri Bhagwati Sutra Part -6

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : श्रीमद भगवती सूत्रम् पार्ट - ६   - Shri Bhagwati Sutra Part -6

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about अज्ञात - Unknown

Add Infomation AboutUnknown

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
[ १७४३ ] स्थविरो के সহলী ह । उदादर्णा्थ-- किसी सेठ की खी ने कहा-“घर मे चोर 'घुख आये हैं ।” सेठ ने उत्तर दिया-द्वां, मुके मालूम है.।? खी बोली--जानते यो, मगर माट चला जायगा तो जानना क्‍या काम आएगा 7 | जा . माल जाने के समय ऐसी गलंती कदाचित्‌ ही कोई करता होगा, मगर धर्म के काम में अकसर ऐसी गलती होती है । यह जानते हुए भी कि यह याज्य चौर यह प्राह है, मह्य को प्रण नहीं कसते श्चौर दयाञ्य को दयागते नहीं । पेसी अवस्था मे जानना किस काम भाया † प्रतएव विवेक की साधकता के दिए आच- रण में उसका उपयोग करो । स्थविर भगवान्‌ कहते ६--दम विवेक ओर विवेक का अर्थ जानते हैं। न जानते होते तो आपके वचन्नों को कटुक रूप में प्रहण स्योन करते? मुनि ने कह्दा--अगर आप विवेक और विवेक के अर्थ ऋ ২৯৬ কি, बा, ১৪ वेकं ১ _ ४७ को जानते है तो बताइए कि विवेक क्‍या हैं ओर उसका अर्थं स्याद !? स्थविर भगान्‌ ने स्तर दिया--ष्टमारे मद विदेक है ओर आत्मा ही व्विकका छथ ह । सनि आसम्रावय समझ ल्चा हागा, मगर ह्‌




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now