हिंदी नाटकों पर पाश्चात्य प्रभाव | Hindia Natko Per Paschatya Prabhav
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
44 MB
कुल पष्ठ :
469
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
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এप्रर हारर दजेडी, फ्रांस के क्लासिवल दुखान्त नाटक,प्राधुनिक दुखान्त नाटक भ्ौर उनकी विशेषताएं २४
আাহজাং देशों के- सुखान्त नाटक और उनकी प्रवृत्तियाँ २६-२६
सुखान्त नाटकग्रीक धुखान्त नाटक, रोमन काल की केमिडी, मध्ययुगकी
कामेडी, प्रापे श्रौर पैस्टोरल, कामेडिया देल आतें,
मोलियर `> घुखान्त नाटक, रेष्टोरेशचन कामेडी या कमेडी'
श्राफ़ मैनर्स', श्रठारहवी शताब्दी सैन््दीरन्न्टल कमेडी,
प्राधुनिक कामेडी श्र इसकी विशेषताएंमेलोडामा श्रौर फासं २६
पाश्चित्य नाटकों के विभिन्नवाद, धाराएँ, उनके संस्थापक्ष
और समर्थक ३०
१-उदातवाद { क्लासीसिज्म) ३०
२-स्वच्छन्दतावाद (रोमांटिसिज्म ) ३१
३ यथाथवाद জী स्वाभाविकतावाद ३१
यथार्थवाद की मूख्य प्रवृत्तियाँ ३२
यथार्थवादी नाठकों की शिल्पविधि ३२
पाश्चात्य देशों में यथार्थवादी नाटकों का विकास ३४
रूस में यथायवादी नाठकों को उत्पत्ति और उनका विकास ३५
इब्सन तथा यथार्थवादी कला की परमोश्नति ३६
जाजं बर्नाडि शा २८
इंगलैण्ड के यथार्थवादी नाटककार ३६
४-स्वाभाविकतावाद (नेचुरलिज़्म) ३९
स्वाभाविक्षतावादी नाटकों की विशेषताएं ४9
५-प्रतीक वादी नाटक और उनकी विशेषताएं ४१
६-प्रभिन्यंजना वादी नाटक तथा उनकी विशचेषताएः ४३
युगेन श्रो नीलं ४
उपसंहार ४६
अध्यायहिन्दी नाटककारों का प्रारस्भ--भारतेन्दु
उसके ससकालोन तथा परवर्ती नाहकों पर
पाश्चात्य प्र्षव ४७-७६ ६
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