मित्र के नाम पत्र | Mitra Ke Naam Patra

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
184
श्रेणी :
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रवीन्द्रनाथ टैगोर - Ravindranath Tagore
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सुरेश चन्द्र शर्मा - Suresh Chandra Sharma
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)मित्र ই গান ঘর... ৃ | | ` च,
उपन्थासक्रार् अकि का श्राद्र दो सहा था रौर उनकी. युद शपित विये गये
मे । অজ সুভ पुरुष ने अपने गले से द्वार उतारा शोर अपने चरणों के पास बेडे
एक तरण शेखक रवीन्माय ठाकुर के गले ন ভারা दिया ।
किंप बाबू का यह कृत अब सक्षी जगह उदार और उचित माचा गयो है ।
दुस्तर कठिनाइयों के बीच, जिसको. प्राप्त करने के लिये ओर सब घोर परिश्रम `
कर रटे मे, उस तक, अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रतिमा की तेज -छलाँग से, रबीखेनाथ सहन
ही पहुँच गये । कला के रादा को जे) पदक प्रु घले दिखा देते थे, उन्होने स्पष्टता
के साथ देखा । साथ ही- अपनी बाद की रचनाओं मे, वह आपने पिता कै
शआाध्यात्मिक सम्देश को और भी ক্যা ले गये हैं शीर অন্যটি स्थ
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