ग़दर के पत्र | Gadar Ke Patra
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
7 MB
कुल पष्ठ :
170
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)पत्र न ० २
( यह पत्र जनरल सर हेनरी बनांड ने जज कार्निकवारेंस
के नाम १७ जून, सन् ५७ को भेजा था । )
प्रिय वारेंस !
किसी असाधारण प्रकार के अचल व्यक्ति नेमेरी बर्माती
गायव कर दी है । यह मेरे पास केवल एक ही थी।
हमारे बेंगले में दो संदूक हैं, जो मामली देवदार
को लकड़ी के हैं, ओर इनके अंदर टीन मढ़ा है । सचसे
छोटे में एक वहुत बड़ा भूरे रंग का *जोमेंटल् कोट ( रक़्खा
हुआ ) है अगर आप कृपा कए; बक्स खोलकर कोट
मेरे पास भेज दं, तो बड़ा अनुम्ह होगा ।
अभी हम दिल्ली के सामने पड़े हुए है, या जेसा किसी ने हैँ सी-
रूप में कहा है--“हम अभी तक दहली के पीछे ই, জী কী
मेदानी तोपों के द्वारा तोड़ी जानेबाली थीं, १८ पोंड वज़नी गोलों
के मुक़ाबले में ज्यॉ-की-त्यां वेसो ही मजबूती से क्रायम हैं। हम
महल पर गोज्ञाबारों करते रहते हैं, और अभी तक किए
जा रहे दै । राइफ़ल्ड पल्टन के एक गारे ने एक हिंदोस्तानी
सिपाही को वदू का निशाना बनाया, ओर उसकी ८७
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