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महात्मा दूलनदास जी का जीवन-चरित्र | Mahatma Dulandas Ji Ka Jivan-Charitra

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Book Image : महात्मा दूलनदास जी का जीवन-चरित्र  - Mahatma Dulandas Ji Ka Jivan-Charitra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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उपदेश का श्ंग ः श्र नानक नाम कोर सता है से माहिं प्रगट जनाईें ॥०9 घ्रुब प्रह्माद यही रस माते सिव रहे ताड़ी लाई 0८1 गुरु की सेवा साघ की संगत निसू दिन बढ़त सवाई ॥॥ दूढनदास नाम भज बन्दे ठाढ़ काठ पछ्डिताइ ॥१०॥ ॥ शब्द १० है जग में जे दिन है जिंदगानी ॥ टेक ॥ लाइ लेव चित गुरु के चरनन उस करहु न प्रानो ॥९॥ या देही का कौन भरासा उभसार भाठा पानी ॥२॥ उपजत मिट्त बार नहिं लागत क्या संगरूर गुमानों ॥३॥ यह ता है करता की कुदरत नाम तू ले पश्टिचानी ॥2॥ आफ भढेा मजने का ऊौसर काल को काहु न जानी का काहु के हाथ साथ कु नाहीं दुनियाँ है हैरानी ।.६॥ दूलनदास बिस्वास भजन करु यहि है नाम निखानों ॥७॥। ॥ शब्द र१ ॥ ते राम राम भजु राम रे राम गरीब निवाज हे। (टेक राम कहे सुख पाइहे सुफछ हाट सब काज । परम सनेही राम जो रामहि जन को लाज हो ॥ १ ॥ लनम दोीन्ह है राम जी राम करत प्रतिपाल । राम राम रट लाव रे राम दीनदयाल हो ॥ २ ॥ मात पिता गुरु राम जो रामहिं जिन बिसराव । रहो भरोसे राम के तैं रामहिं से चिस चाव है ॥३0। चर बन निस दिन राम जी शक्तन के रखवार । दुखिया दूलनदास को रे राम लगइडहिं पार हे। ॥9४॥ (१) बढ़ा । (२) घटा ।




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