ब्रह्मसूत्रम | Brahmasutram

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[ २३ ] * विपय तृतीय अध्यायका आरम्भ ज ४ तदन्तरमतिपत्मनपिकरण ॥१।११-७ [ पृ० १६२१-१६४६ ] सृतीय अध्यायऊे प्रथमपादक प्रथम अधिएरणफा सार गूत्र--तदन्तरप्रतिप्ता० ३१1११ तु द्वितीय अध्यायके वृत्तया अनुवाद कर दृतीय धध्यायके विपयका संक्तेपत: फथन. ... देहके वीजभूत भूतसूल्मोंसे जीव भपरिवेष्टित जाता है [पूर्वपक्ष] भूचसूक्ष्मोंसे परिवेष्टित दी जीव जाता दै [सिद्धान्त]... सूत्र --ख्यात्मकत्वात्त भूयस्वात्‌ ३।१॥१॥२ रुके जल च्यात्मक है न 2० सूत्त--प्राणगते ३१११३ डड हि प्राणफी गति 'आश्रयके निना नहीं दती ... 2०४ सूत--अग्स्यादिगतिशुतेरिति० ३११४. ««« देहाग्तरकी प्राप्तिमें प्राण जीवफे साथ गहीं जाते हैं [पूर्वपक्ष] उक्त पृर्षपक्षला सण्हन [सिद्धान्त]... दे सूत--प्रथमेडभ्रवणादिति चेज़्० ३३११५. ..« “वश्वम्यामाहु तायापः पुरुपबचसो भवन्ति! इसका निधोरण फिस प्रऊार है ? [पृर्वपक्ष] ४ ब्क पक्त शक्काझा सण्डन. .. 4 पैदिकप्रयोग दर्शनसे श्रद्धाशद जछका बाचक है... सृत्र--अथुतत्वादिति चेप्तेशद्‌० ३॥१।॥॥६ ««« जीव परिवेष्टित नहीं जाता है [अन्य पूर्वपक्ष] उक्त पूर्वपक्षका पण्डन *४- 3०४ सूत्र--भाक याध्नात्मवित्त्वात्तयादि दर्शयति ३३११७ ते घन्द्रं प्राप्प भ्रन्न॑ मवनति! इस श्रुतिसे प्रतिपादित इष्टादि- कारियोमें जो अन्नत्व है वह भाक्त है बन “अनामविच्वाचथादि दृर्शयति! इसकी जन्य व्याख्या छत्तात्ययापिकरण है 81२८-३१ १ [ ए० १६४७-१६६९ ] द्वितीय भधिकरणका सार ब्ड्ह ब्दड सूत्र--श्तात्यये ब्नुशयवान्‌ दृए्स्मृतिभ्यामू० ३३१२८ इश्टादिकारियोंका चन्द्रमण्डलसे प्रत्यवरोह दिखलाकर थे निरनुझय क्षाते हैं या सानुशय आते हैँ इस प्रकार संशयका कथन पृष्ठ पै० १६२१- १ १1६२१ - ८ 14६१३ - १ १६२२ - १५ १६२४ - ६ १६२६ - २ १६२९ - १७ १६३०० २ १६३१ - २२ १६३२९ - १६३२ - २१ १६१३-४२ १६३३-५ १६३४ “ १५ ६६१५- २ १६३६ - २ १६३७ - ६ १६३८ न ३० १६३९ - २ १६३९-५५ 1६४२ « ३० १६४३ - रे १६४५ - २ १६४७ - ६ १६४७ - १' १६४८ - २




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