महाभारत का भीषम पर्व्व | Mahabharat ka Bhishma Parvv

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Mahabharat ka Bhishma Parvv by वेदव्यास - Vedvyas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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नकली ला ध मखएआख।पभफभनन्‍फिुच जज +ततऔन++तम._न.._.तहत..न..त>>+-त.-.-->5ु14286 ] छलादणाक्न पं ( ४०३६ )चेडध्ययनसम्पक्षा सर्च *द्धाशनासद्व | आशसन्तो जय यदझ्े पलेनाभसुखा रणे ॥ ४ ॥ आभिवाय चरदु्थर्पा धारंगश्स्य याहिनीस्‌ | प्रायमखा पराश्चिममागे सलसेगिफया ॥ ५ । समन्तपश्चक्ताद्यदर शिावशाणि सहस्लश | कारया मास धांधचत्‌ कुस्तीएपों याधाछए ॥ ६ ५ शूयाद्य पूृथियी खर्चा धालंबुद्धाव शापेता । निरश्व वुरुषंबास द्रथकुतरचार्जिता ॥ ७ ॥ यावत्तपात्त सून्‍॒यों हि जम्यू ड्वीपस्यमण्डलम्‌ । ताथदेव समायात चल पार्यियसत्तम ॥ ८ ४ पएफ्स्था सर्वेबणों स्वेमण्डल बएयोजनम्‌ । पय्योकरामन्त देशाश्र नदी शलायन्‌ वनानच ॥ ९ ॥ तेषां युधिष्टिरा राजा सर्वधाएरुपरंस ! व्याददेश सवाह्याना सत्यभाज्यमन्रफ्त मम्‌ ॥ १० ॥ सय्पाश्व िविधास्तात तपारानों ग्रुधिष्तर । एपवेंदी चाद्तन्यमें उत्तकर कौरवों के सन्पुख घनेपान हुए, और पराक्रग के द्वारा बिगययी आशा रखनेयाक्े पृद्धसूपि प्र बचेगान दुपाघन के उस दु!खसे महाखादित स्ेनाक सम्मुख पहुँचकर कुकक्षत के पढिदग भाग में समाभाक गतुप्यों समेत पृतरामि- ग्रख है स्थिरता से नियतहुए | ५। फर कुन्तानन्दन दाधाएए ने स्वप्तापचकर से बाहर अपनी बुद्धेक अनुसार हजारों शिविर अथात्‌ खपटर तथू तेयार किय और बुद्ध वाढक द्री इनको छादकर सघ पृथ्वी के पलुध्य गाजर हाथी घाद रथ इत्यादि सपत यहांतऊ इक हुए कि पृथ्वी के प्रदक्न नि्नेन स हागये, ह राजन जक्ोशग अहातक कि छये में' अकाझ् करता हुआ स तह काता है उच्त पृथ्वी पेदक के सबरजा लेग अपनी २ सेनाओं समेत आकर इबद् हुवे सर वर्णोनि देशनदी पत्रतों को। और बहुत योधन के उस पृथ्वी एडझफा उछघन झग्क एक स्थान निवाप्त किया । ९ । तब गहा चुद्धिपान राजायुधिप्िर ने उग श्रष्ठप्नत्री राजाओं से लेकरस्लच्उपर्यन्‍्त लोगोंक निभितत बहुत उत्तप २ प्रकार भोजनों के घतवानेकी अशज्ञादी और भागनक अनस्तर शात्रि कु छएप्य सब छागोंफा॥8णा३॥ _ह1५ फक्ण-घाछ. 11058 इीणुद्ाब 0 016 3 एतेफ४ $00.. हालए तंणा2&॥0 10 छ%७ जाते छवछु दल्या018 01 51९४० 5. 48०0 ॥16 #&[० ग0 4 थी (गए ६7००4. 8 ए77०5८गगड धीह गा, एी जिप्राएण्वीएका पी ग्राप्पाद्र0५ छत ४४ 850छ्ाचप॑ पएए।. जा एव (०. पाए छ०४४ ए 019 फ़ौशा गम (17 िठ85 209 घत8 77७४ ५३ थे 9. ऐ पतकात का. धार 8907 व 3 पद द्प्रडत्ते शा०्प्रल्याप ४ ४10५ ६० ;>९ एलूच का १ 7०एपोश णर्देश' ) 8 णाऐे सिक्रा्राफगराएीओं,.. 48 उल्‍्थाध्वे बढ व 196 5106 सजी कप ए०प्राछते तै050७ का पी ए5 100 एव छोगा ग्ष्ण 05 जाते लेधफफ्रत्ताड गाए त्रषते ॥छेए ०गो5पी6 लापताला काते 48०१ एडकफर|ं७ १6 वैेणार.._ 116 छ]10 ० त बचाए पपे ए एग्रपेक गि6 हवा ]०॥०0 ६० 10४७ एफ छो? ७90०... 1 €९णू७ ० कह] ४४००8 हो एऐ पाल ५ ७४ घशाद का भणीहते ७ पशोप्ड ०१०४ गे 315६४ ७००ऐ5 शाऐे एड 9 3 पवी नाता, पीठ ०७६ ण कराया तातेकाते छुा0०त 090 गापे ०वाशग०0८०गा165 0 1५ उचए[ओर्ल्एद ६ 01५ ७ प1190 तय शीपा 1 छांड,.. 66 8१०कि-जाकजि-+-+त+-तनत+-+ +++++_++*_*+“:5




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