रातों जगी कथाएँ | Raton Jagi Kathaen

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Raton Jagi Kathaen by पद्मा सचदेव - Padma Sachadev

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about पद्मा सचदेव - Padma Sachadev

Add Infomation AboutPadma Sachadev

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
गले लगने का सुख 25 - धन्यवाद, सिस्टर ! श्याम बाबू ने वे कागजात अपनो जेब के हवाले कर लिए । अस्पताल से वे गेट की ओर चल दिये । एक टैक्सी भे बैठ कर वे सभी अपने घर चले आए । राहुल को घर आए हुए दो-तोन दिन ही हुए थे | गोपा ने भी ऑफिस सै इृटटिया ले ली थीं | दोनो सास-बहू राहुल की हो सेवा शुश्रूपा म लगी हुईं । नित्य की भाँति महरी भी आ गई 1 छूटते ही उसने पूछा, “राहुल बाबू अब कैसे हैं ? मै - पहले से कुछ ठोक है । उन्होने बताया, “सिर पर दो-तीन टाके आए हैं ।! - भगवान का शुक्र है । महरी किचेन की ओर चल दी 1 वे भो उसी के पीछे-पीछ चल दीं । उन्होने महरी से पूछा, “तेरी बहू आई कि नहीं ?!! - नहीं बीबीजी । बर्तन मलती हुई अनारो उदास हो आई, “हमारा विनोद ता हमसे न्‍्याए भी हो गया है 1” - ओरे । गोषा के मुह से निकल पडा ) - हाँ बीबीजी । महरी ने गहरा उच्छवास भरा, “इन दिनो तो वे दोनो आकाश मे तैर रहे हैं । पर कभी-न-कभी तो 10 - हाँ री ) वे बेटे के लिये चूल्हे पर हलुवा घोटने लगीं, ““पखेरू भी तो नीचे आकर ही घोसला बनाया करते हैं न 1!” - लेकिन बीबीजी.। महरी बर्तन पोछने लगी, “माँ का दिल कुछ और ही हुआ करे है ।” - हाँ, सो तो है ही । उन्होने भी उसी का समर्थन कर दिया, “' आजकल के छोकरे माँ को ममता कया जाने !/' काम समाप्त होने पर महरी किसी और घर की आर चल दी । व॑ ते बना चुकी थीं । बहू क॑ साथ वे बंटे कां पूछ-पूछ कर हलुवा खिलाने लगीं । - माँ ! राहुल ने खाली हो आई प्लेट माँ का थमा दी “कहीं तुम मुझसे नाराज तो नहीं हो 7! - नहीं रे । वे पूरी तरह से भर आईं । “माँ भी कभी बेटे से नाराज हुआ करती है ?!! - मेरी अच्छी माँ । राहुल ने उनके गले मे बाहे डाल दी । ऐसे मे वे और भी भर आईं । आँखे थीं कि खाली होने का नाम ही नहीं ले पा रही थीं । जब वे खूब बरस गईं तो उनका हाथ बंटे के कंधे अय। जा लगा, “तुम नहीं समझोगे, पगले। माँ त्तो मोमबत्ती हुआ करती है । भजत्ती ।'




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now