प्रतिवेदन के स्वर | Prativedan Ke Swar

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
664 KB
कुल पष्ठ :
126
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)रातदिन तानेरातदिन तेवररातदिन क्चिवियनौजवान पशेप्तो से दौदी का लगाव
उसे नहीं था स्वीगार 1लेक्नि वहु करता कयामूर्ता भौर सलवारमुर्रा शोर गसे का हारजुटा सफना था ध्रात्तान महों ।
दोनदार, पर यह मजबूर थारोजी कमाने का सलोपा उससे दूर था,
देपा था उसने नेभ्रामदत का कोई द्वार 1उस प्रभागे दियेजागा पग्रधानव उसका भागयोधी की गुप्त ग्राय का जब मिला उसे सुराग
गिलद झोर घांदी पे जेवरभूठे मोतियों पे सतलड़ हार,
छोंट के कुत्ते,साटन के सलबार,देखता रह गया यह श्रर्िं फाड 1
एक बार शौरत की कमाई में
झ्राग लगाने का हुम्नमा विचारपर खानदान की इज्जत का सवाल
उसके था भागे,घह चुपचाप था,था यह लाचार )प्रतिवेदन वे” स्पर ]
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