नन्दरानी तथा अन्य एकांकी | Nandrani Tatha Anya Eankanki

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutShambhudayal Saxena
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
925 KB
कुल पष्ठ :
166
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about शम्भूदयाल सक्सेना - Shambhudayal Saxena
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)संदराजी ] [डरमह ब्ानपे हुए भी में उसे कंसे सुधाऊ ? फिर इसने बड़े कलक की
बात [मदरानी
ठमी हो मुझे सुता बहिन | हुस शौर कसक का इतमा बड़ा
बोर मैं तुझे; भकेसे दोसे गहीं बु गी। तेरा दुवल घरोर
देवको
मैं सुनाऊं घो तू मुझे घृणा छे दुरदुरा देगी | तैरे स्नेह वी
विधि को छोने का जोखम कंसे उठाऊ मला ?
शदइशमी
जिसे मैंने शरमुना को साक्षी करके सली माना है सूर्य प्रोर
श्रंद्रे जिस बहिनापे के पवाह हैं वह गया यों टूट सकता है
भोत्ती !
देघढी
भप्तोदा जोजो ऐेरा हुठ | उप्तके प्रागे बया मेरा द्रव ठहर सकता
है। छेसुन | ( पुह बोड़ा भाये करके इस प्रडार कहती है कि लप्तोरा के
प्रिया कोई प्रौर न सुन पापे । ) मेरा छुह देसना पाप है नदराभी।
में पुषधातिनो है। में प्रपनी संत्रति को भाप हो सवा जाती है ।
सदरामों
( प्रदरक् में भरकर ) यह तू बया कहती है देवकी ?
User Reviews
No Reviews | Add Yours...