संदीपन पाठशाला | Sandeepan Pathashala

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Sandeepan Pathashala by ताराशंकर वंद्योपाध्याय - Tarashankar Vandhyopadhyay

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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जाप्रत हो उठा । उहोंने कहा, हमारे गाव मे स्कूल है--भद्ग लोगो का गाव है लेकिन ब्राह् णो के लडके, हमारे बेटे पढते-लिखने नही। स्कूल बनने के बाद दो सडके बी ए पास कर चुके है, और कोई भी एंट्रा स तक पास नही कर सका । खैर, तुम लोग सीखो, तुम लोग बडे होगो । यकायक सीताराम हाथ जोडकर बोल पडा, मैंने नामल पास क्या है यह आपसे किसने बताया, यह मु्से नही मालूम, लेकिन मैंने दो बार परीक्षा दी है, पास नही कर सका हू । मणिलालबाबू अब विस्मित हुए । सीताराम ने कहा, तो अब मैं जाऊं ? मणिलालबाबू बोले, तुहारा बल्याण होगा। बाद में मुझे मिलना । 1] सीताराम भाग्य मे विश्वास बरता है। समी सुख भौर दु ख के निय ता के रूप में उससे भय भी करता हैं, भवित भी । अपने भाग्य वो वह वारम्बार प्रणाम करता है । आज के दिन के लिए इतनी तृप्ति, इतना आश्वासन, इतना भआानाद उसने स्चित कर रखा था। मणिलालबाबू का वह आशीर्वाद और स्नेहपूण बरताव ही सवकुछ नही, उसे और भी कुछ मिला। अपने कमस्थल, जमीदार भवन मे आकर लडको के पढने के कमरे मे उसने अपना सूटकैस रखा । यह कचहरो उसने इससे पूव भी देखी है । पहले भी वहू यहाँ आया है । तब जमीदार बावू जीवित थे। वे बडे गम्भीर और भयकर प्रकृति के ये। प्रताप और प्रतिष्ठा मे वे मणिलालबाबू के समकक्ष तो ये ही, तिस पर अपने सहज सत्य आचरण ओर स्पष्टवादिता वे बारण सभी के आदरणीय भी थे। विपयी व्यवित थे किंतु कुटिलपया के पक्ष पाती नही थे । विरोध ठन जाने पर बे जो कुछ करते कह सुन कर करते थे और अयाय चाहे क्त्ती का भी हो और कही का भी हो, प्रतिवाद करते थे ! सीताराम के भन मे एक बात बडे गहरे मे रेखाकित है। यहाँ यह कत्ल हुआ था, इस गाव के और थाने के सामने । पुलिस ने सवेहव्श इसी गाव के दा भद्र सतानो को गिरफ्तार क्या। भद्र सतानो में जो लोग शराब पीकर गुडई की भेंडती कर अपने की घोफनाक रूप मे प्रतिष्ठित करना चाहते है, उाही में अमूल्य जौर भूषति को इसे सिलसिले में पुलिस साहब ने पकडा और गाँव के समाजपतियों को बुलंवाकर इन लोगा के चरित के बारे म राय जानना चाही! इस घर के मालिक को भी बुलाया था । पूछा था, प्रमूल्य और भूपति इन दोनो को आप जानते हैं? ये लोग शराब पीते हैं ? मालिक ने जवाब दिया था, हाँ जानता हू । दोता ही याँव के टिग्ते मेरे नातेदाद हैं और शराब पौठे हैं। कया ये भयानक प्रकृति के हैं ? भयानक प्रकृति कहने से आपका तात्पय क्‍या है, मुझे नही मालुम ठीक-




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