जब आवेगी | Jab Awegi

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[११ 2-15 855 1 ्िलपियय साँवता माली, चोखा भेला मेहार, सेना नाई, जनावाई दासी, कुर्मदास ब्राह्मण, और न जाने कितने थे वे * ब्ाहाणए बत्सगोत्री व्यम्बक पत देशाधिकारी था। अकाल में लोक सेवा भे भ्रपना सब कुछ छुटा बेठा ॥ आपे गाँव में उसका पुत्र हरिपन्त राजा सिंघण देव वाले युद्ध के वाद नाथ पथ में दीक्षित हुआ । उसका पुत्र विछलपत संन्यासी होगया और श्रीपांद स्वामी की झाज्ञा से गृहस्थ घर्म मे लौट झाया ४ उसी की संतान थी यह--निदृत्तिनाथ, ज्ञानेश्वर, सोपानदेव और घुक्तावाई । उपनयन नही हुआ्आा-समाज से तिरस्क्ृत के पुत्र थे न ? ब्राह्मणों ने पुन गृहस्थाश्रम में लोटने वाले को त्याग दिया । विछलपंत और पत्नी रुविमणी ने दुख से प्रयाग में नदी में क्रृद कर आत्महत्या करली । सिद्ध गैनीनाथ में बच्चों को संभाला | सिद्ध की करुणा जागी। अब यह चारो अत्यत प्रसिद्ध थे १ शञानेश्वर ने ब्राह्मणों को योग का गौरव दिखाया, गीता का भाष्य लिखा ) वे सब तीथें यात्रा पर गये थे ॥ वही मिला था भागदेव दर्जी झौर वहीं मिले चाँग देव “* पणढरपुर, उज्जैन, प्रयाग, काशी, गया, भ्रयोध्या, गीौकुल, वृन्दावन, द्वारका, गिरनार * वही मिल्ले थे वे कगरनाथ को यह थी म्रुक्ताबाई । एक बार नगी नहा रही थी। चाँग- देव ने देखा तो मुह ढक कर लौट चला। मुक्ताबाई ने फढ- कारा + वृद्ध होगये, आत्मतत्त्व नहीं जाता । स्त्री पुरुष का व्यक्ति-मेद हैं ही क्‍या ? चाँगदेव को फिर तत्व बोध




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