मूल सुत्ताणि | Mool Suttani

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1930 Mul Suttani by कन्हैयालाल - Kanhaiyalal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अ० ४] दसवेआलियसूत्त १९ जरज अत दिया वा राओ वा ेु एगओ वा परिसा“ओं वा सुत्ते वा मागरमांणे वा से भर्गाण वा इंगाल॑ वा मुमुरं वा अच्चि वा- जाल वा अलाय वा सुद्धार्गण वा उबके वा- तजेज्जा गधघहेजा- न भिदेज्ञा- न उज्जालेज्जा त पज्जालेज़्जा न तिव्वावेण्जा- अक्न न उंजावेज्जा नघट्वावेज्जा ने भिदावेज्जा ने उज्जालादेज्जा त पज़्जालादेज्जा न निवाबेज्जा अन्न उजत॑ वा घटुंते वा भिदंत दा- उज्जातंत वा पज्जालंत वा तिव्बावंतं दा न तमणुजाणेज्जा जावण्जीवाए तिविह तिविहेणं मणेणं वायाए काएएं- वे करेमि न कारवेसि करतं-पि अन्न न समणुजाणामि तस्स भंते ! - पडिक्कसामि निदामि गरिहामि अष्पाणं बोसिरामि ॥३॥ से भिवख वा भिवदुणी वा संजय-विरय-पड़िहय-पच्चरखाय-पाववकमे- दिक्ा दा राज वा-




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