ब्रजविलास | Brajavilasa

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Brajavilasa by गंगाविष्णु श्रीकृष्णदास - Ganga Vishnu Shrikrishnadas

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about गंगाविष्णु श्रीकृष्णदास - Ganga Vishnu Shrikrishnadas

Add Infomation AboutGanga Vishnu Shrikrishnadas

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
हे हे... कब कफ ] जम 11५ पं 1 कि डे | ) | ६४ व (६ ६ ड का] सहमत की ५-रंबन-म-०-२७३३७३५७०७३.-५०५ पक ->लमजकट: ०» अपोनवन>+--॥0जत+ -न्‍वंपा अपोलथ नाथ 33. + हे बन्‍मों. अन्‍०- बे 4- अय >>. जल बज अब मी ४2.32 अ>+>->++ ५७०७+---+>>ट 1 0 35... अन्‍नभ अत + + + समन जलन कपूर 2लसलसस पान «5 जन भा. ४ का ६५ तब (+< ह्न ४ ः ५ पे 1) है ४ ध् (57% 3 अध | » ४ े 1 स्् ब | ल्द । ह न । प ' पं हे ५ ॒ ब्ब५ + ३ 5» 1 5 1७1३] ० तू ९ ८2५ ५७५०। ४) ५३४० न 7 7५ ५ थीशुत पै० ज्यूयपहादहत पी ्‌ु 1 ३१३ ४ ः गण । है नस शा! न छः 3 + अर लक 5 छू एप की गहाशय! ढाजिये बाई तुलशीदएजीकोी आए काइताका अशाय गाषायत लाजि), शाप | कला मोम अर पु कर बन गो फ्िप्रशा ः धर हि 0 हा ५ शपकी व शमाशवध शाहुत जुबाध टाका कया बा ६ उत्ताश जहद दया हुं शुह्ह| दुवुछ & ३९ शशायण रह्ाह[। सुन्दर अक्षर समस्त शेषक तथा राणा शगेध सहित जिल्द व रामायण बोटा अक्षर । ऐों छापी है सब क्षेपक रामा बगेव गक् हे यह बालतदोंकों सुखदायक है शूल्य9 हु० श जे 1 हा नर ८४ दा ब्लड कस | शधीयण शच्का थह पुस्तक देशाटनीय एुइ्पोंकी लाभदायक है मूल्य १ ४० शी अचिर्ध जाए । पत्णकों यथातथ्य सरल हिन्दुस्थावी भाषाओं उत्शा बनवाकर स्वच्छता एंगेक छापा &्‌ हेमूल्प केवल १ ६०... जम दाल्याकाओ राजद | ! कि सबहागे बोग्य कृशई गई हे इचिए स्थलोंवें अधुर हृएम्तों ओर उदाहरणोते अर्थ एए कि है किन्तु बूढाशियोका अर्थ तो विशेषही दर्शाया है, विशेष अलापसे क्या, शीवता करो पीछे मूहय बढ़ाया जविगा, यह एस्तक कथा बांचनेगें परभोपयोगी है धृूल्य केवड २३ २० है। अगदाल्यीकाय शाण/यण कंबल जाए उपरके अलंकारों समेत प्रतिसगेके आदि अंदका प्रतीककों एक २ श्लोक है. प्रतीककेलिये शीकांकभी डाले गये हैं पुस्तक दो जिर्होंगें बहुत पु बँषी हें मूल्य केवछ १० रू० मात्र हे॥ अज्ञिवरक्य मंताक्षरा पद, योजवा, भावार्थ, वालयर्थि सहित ह धर्मशाद्ष सम्बन्धी अन्य समस्तग॒हस्थोंकों अवश्य रखनाचाहिये इसके द्वारा छोकिक काम | धर्म पूव्वक होते हैं सर्व देशेपषकारक उत्तम्ीका हुई है, गहाशयोंमें अन्यस्तृतियों की टिप्पणी लगाई गई हैं मिससे अन्य ग्रंथ की अपेक्षा नहीं रहती यद्यपि उक्त अलंकारों से पंथ बढ़ गया हे तथापि मृल्यकेवल ६ र० है ॥ | आमहोस्वामे तुलसीद्मजीके पोड़श अंथ एक और अछग ९ भी मिलते हैं | रामकथाउरागियोंके अवलोकनाथे बड़े परिश्रमसे गुसाईजी के १ अन्य सुद्वित किये हैं मूल्यथोड़ाहे ॥ पुस्तक मिलनेका ठिकाना-गंगाविष्णु श्रीकृष्णदास. रक्ष्मीवेडुटेशवर छापाखाना, कल्याण-बंबई 22 डा पलन«>+--




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now