पश्चिमी यूरोप भाग - 1 | Pashchimi Yurop Bhag - 1

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
12 MB
कुल पष्ठ :
562
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)का , 5.जमेन जातियोंका प्रवेश, रोम सोम्राज्यका अ्रघ पतन । ६७जमैनोंक्रे किती श्रदेश हुए और दूसरे रोमकी सभ्यततांडा इनपर कितना
अभाव पढ़ा । प्रथम ता यही ठीक तौरस निश्चय नहीं हो सकता कि
कितने लोग आये | एडियानोप्लफ्ी लड़ाइके बांद कहा जाता दे कि लगभग
४लाख पश्चिमी य,थ जातिऊे पुस्प'तथा स्त्री वच्चे'साम्राज्यमें आबये 1 सबसे
बढ़ी! सख्या इन्हींकी थी। और समय कुछ कम ही लोग अति थे और ये
आकर' रोम राज्यकी भूमिपर बसते थे। इनफ़ों कलांकोशल, साहित्य आदिसे
कुछ प्री ते नहा थी केवल लड़ना मिडना और शारीरिक छुस भोगना दी इनकों
अभी था। इस कारण रोमकी दी हुए समभ्यताका बहुत कुछ नाश
हुआ। पर यद्त न समझना चाहिये कि यह! सभ्यता पूरी तौरमे नह
अए्ट हो गयीं, क्योंकि जय जर्मन'जातियां स्थायी रूपसे बस। तब इन्हें भी
कृषि करना, सड़ेके घनाना आदि हुनरोंकी आवश्यऊता पढ़ी, ओर इन्देंनि
आचीन नियमों ही पालंन'किया । पुन परस्पर विवाह आदि शेनेंडे
कारण इनकी भाषा और रदहन सहनके ढग भी रोम॑न लोंगोंकेस हो गये
मित्र मिन प्रदेशों एक ही लीठेन भाप कई अ्रशरसे बोली जाने
लगी और इसीसे आधुनिक फ्रान्सीसी, स्पेनिश, इटालियन और
घुपगाज भापा निकला हैं । दोनों जातियोमे इतनी एकता होने लगी कि
फ्रा राजागण रोमन लोगेंको अपने राज्यमें बड़े घड़े पद देने लगे। फेवल
एक बातमें अन्तर बना रद्दा । वह यह कि अत्येक जाति अपने दे कानूनका
पालन फरती यै । रोमन लोग अपने प्राचान प्रफारसे न्यायालय जाते
थे आऔर गयादी मिरह ओर वहसकी राति बनाए हुए थे। प्रन्तुजर्मन *
लोग अपनी ही रातिका पालन करते थे। इनकी रीति जान लेगा चाहिए। इनके
यद्टा, तीन प्रकार थे-एक यद्ट कि वादी या प्रतिवादी बहुतसे लोगोंको +_
इकट्ठा करके लावे, जो इस बातकी गवाही दें कि अमुक सलुष्य इतना ,
सर्चारेत है. कि वह भुठछ नहीं बोल सकता और जो वह कहता दे बह
अवश्य ठीक होगा इसे “कम्परयेशन” कहते भरे । उनका विश्वास यदू '
था कि जो मूठ बोलता हे उसे ईश्वर दर॒ड देगा । द्वित्ताय तरीका यह था
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