भारतीय सहकारिता आन्दोलन | Bharatiy Sahakarita Andolan

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Bharatiy Sahakarita Andolan by शंकर सहाय सक्सेना - Shankar Sahay Saxena

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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छर्‌ भारतीय सहकारिता श्राददोलन कोप ( रिजव फड ) में क्षमा करने के उपरात सदस्यों में बाँटा ला सकता है | इसक लिये रजिस्ट्रार फो श्रनुमति लेमी पढ़तो है। यह प्रातवःघ इस कारण लगाया गया है कि कहों सदस्यों का उद्दंश्य क्वल् अधिकाधिक जाम प्राप्त करना ही न हो जावे। अपरिमित दायित्व वालो सम्रितियों में लाभ धरा तीय सरकार की द्ाजश्ासे ही वाट जा सकठा है; प्रातोय सरकार साधारण अ्रनुमात भी दे सकती है । प्रत्येक प्रान्त ने यह नियम बना दिया है कि प्रत्येक समिति मिछक बापार में ल्ञाभ होता है, लाम का कुछ श्रश रक्तित कोष में रखेगी । रचित कोप, समिति बे भग दो चान॑ पर भा, सदस्यों में वादा नहा जा सकता । रक्तित कोष या तो सम्रिति के व्यापार में लगाया जाता है, या रजिस्ट्रार क पा रहता है अ्रयवा रजिस्ट्रार की थ्राश्ा स॑ थ्रार कहां जमा कर दिया जाता है | समिति क मज्जञ हो जान पर, उतक कऋण को खुका कर जो रुपया बचे उसका उपयोग सम्रिति के निर्णय के बअमुछ्यर होगा । याद सप्रिति इसका निणाय न कर धक तो रजिस्ट्रार जिस प्रशाए डल घन का उपयोग करना चाहे कर सकता हे। बुछ प्रातों में यह नियम दे कि यदि समित्ति किसी श्र य सहकारी सत्या की सदस्य शेतों रचित कोप का बचा हुआ रुपया उत्तको दे दिया जावे । प्रत्येक समिति, चौथाई लाभ रक्चित कोष में रखने के उपर त, लाभ का १० प्रति शत दान तथा श्रागे लिल्ले साव हनिक कार्यों में व्यय कर सकती दै --निर्षनों का सहायता, सार्वजनिक शित्धा (गाबों बचा उन स्थानों में जहाँ उमितियाँ ईं ), औपधि मुफत बेंटवाने का ग्रव च. श्रादि। फोरी घार्मिक पूजा श्रथवा घार्मिक शिक्धा में बह रुपया व्यय नहीं किया जा सकता 1 ( घारा ३४ )1 यदि जिलाधीश जाच क लिये प्राथता करे, पचायत प्राथनाप्त्र भेजकर जञाच करवाना चाहे, अथवा सम्रिति के एक-तिहांइ सदस्य




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