भारतीय सहकारिता आन्दोलन | Bhartiya Sahkarita Andolan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ट भारतीय सहकारिता आन्दोलन असुन्तुष्ट होते दै । क्रमशः श्रौद्योगिक देशो मे श्रमज्ीवी समुदाय श्राज संगठित दवा गया है और इस अत्याचार को सहन नहीं करना चाहता | ट्रेडयूनियन आन्दोलन इसी प्रयत्न का फल है | समाजवाद तो पूंजी- पतियों के अस्तित्व को ही नष्ट कर देना चहता है | वह तथा श्रमजीवी आन्दोलन लाभ को केवल मजदूरों के ही लिए सुरक्षित रखना चाहते ई ¡ सहकारिता श्रतिरिक्त लाम का न्यायपूरं विभाजन करना चाहती है और किसी एक वर्ग को दूसरे वर्ग पर श्रत्याचार नहीं करने देती । सहकारिता आन्दोलन एक आथिक आन्दोलन है | आज आशिक संगठन इस प्रकार का बन गया है कि पू जीपति श्रमज्ीबी वर्ग का: शोषण कर रहे हैं। फल-स्वरूप श्रमजीवी समुदाय पूजीपतियों के अस्तित्व को नष्ट कर देना चाइता है। दोनों वर्गों में मयड्डर युद्ध छिड़ा हुआ हे; दोनों एक दूसरे को दबाने का प्रयत्न कर रहे हैं | सहकारिता आन्दोलन एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहता है जिसमें হুল प्रकार युद्ध न होगा. जहाँ भिन्न-भिन्न वर्ग एक दुसरे का साथ देंगे, और प्रायिक विषमता का यह भयंकर रूप नष्ट हो जायगा | जब सपाज के निबल सद॒स्य किसी मी आर्थिक कार्य अर्थात्‌ उत्पत्ति उपभोग, विनिमय. तथा वितरण में सम्मिलित प्रयत्न से उत्पन्न हुए लाभ को आपस में न्यायपूर प्रणाली से बाँट लें तो ऐसे संगठन को सहकारी समिति कहेंगे |” कुछ लोग सहकारी समितियों की तुलना ट्रेड-थूनियन से करते हैं, किन्तु सहकारी समितियाँ इससे भिन्न हैं। ट्रेड यूनियन आधुनिक आशिक सल्जठन को स्वीकार करती है और केवल श्रमजोवी समुदाय की आर्थिक स्थिति को सुधारना चाहती है; यदि पूजीपति मजदूरों की माँग को स्वीकार नहीं करते तो ट्रेड-यूनियन हृड़तालों के द्वारा उनको विवश कर देती हैं| सहकारी समितियों के कार्य का दल दूसरा ही है, ट्रेंड-यूनियन विधातक कार्य करतो है, और सहकारों समितियाँ रचनात्मक कार्य करती हैं |




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