श्री शिव संहिता | Shri Siv Samhita

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
21 MB
कुल पष्ठ :
218
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)२2उसमें काठका नियम हे इस हेतुप्ते आत्मा सवंथा निश्चय
रेपण है ॥ ५८ व
त्मकैः। तस्मादात्मा भवेश्रित्यस्त
न भवेत्खलु ॥ ५९॥
टीका-यह जो भिथ्या पंचभूत हैं इनसे उसका नाश
नहीं है इस कारणसे आत्मा नित्य है ओर यह निश्चय
है कि उसका कभी नाश नहीं होता ॥ ५९ ॥
मूलप्न >> यो नास्तहित तस्मादेकी$+का-जब दूसरा कुछ नहीं है तो एक वहीं स्वदा
अंद्वेत हे जब उसके सिवाय अथात् उससे अन्य सब
मिथ्या है तो वही एक शुद्ध आत्मा सत्य है ॥ ६० ॥
मूलम-अविद्याभूते संसारे दुखनाशे सुख॑
यतः ॥ ज्ञानादायंतशून्य॑ स्ात्तस्मा-
दात्मा भवृत्सुखस ॥ ६१ ॥
टीका-यह संसार अविश्यासे उत्पन्न भया है इस-
में दुःखंका नाश होनेपर सुर्छ होता है ओर ज्ञान

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