संगीत रत्न प्रकाश भाग 5 | Sangeet Ratn Prakash Bhag 5

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Book Image : संगीत रत्न प्रकाश भाग 5  - Sangeet Ratn Prakash Bhag 5
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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के।, ,महाश्यवर:! परम पिता, परमात्मा को घन्यवादों। परचात्‌ आप से सज्जनों को भी।धन्यवाद हैं कि#'समीत रत्न प्रकाश! जैमी तुच्छ, पुस्तक का आपने, डम्मीदु से बढ़कर मान किया, यह आप सर्व महानुभावों के सह अददण करने का दी0 कारण है कि मे इस पुम्तक का छगभग्‌ दो लाख फे जाय जगत1 5 ८ ॥1 दिमें फैला चुका है। ४ -« * 2०न छ ् ल्‍ है... होल हर ५ हज $ ६ | $इस के पश्चात्‌ में सपने परम मित्र' कु ० कंण!पिंदजी कावे स्थान चहडोली प्रान्च अलीगढ़ को धन्यवाद देता हूँ - कि जिन्‍्हों ने मेरे ऊपर ही नहीं किन्तु समस्त जास्ये-जगतू के ऊपर कृपा कर और महानू कष्ट उठाकर कई मास के छगाठार परिश्रम से “संगीत-रत्न-प्रछाश” के पाचों भागों से उन सब दोपों,का दूर कर दिया है कि जो उन्द्‌ अष्टता आादे के इन पर लगाये जाते थे, यददी नहीं किन्तु अधिकतर मामूली और पुरामे भजनें को 'निकार करनये २ ंड़े:हीः उत्तम २ भजन जआादि को उनकी [जगह दन करके इसकी शोमा को और मी बढ़ा दिया है।




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