प्राण गीत | Pran Geet

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Book Image : प्राण गीत  - Pran Geet
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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आष-दीस दरमुझे भि्ती है प्यास विपमता का विप पीने के सिए,मैं जन्मा है महीं स्वय-हित जग-द्वित जोने के लिएमुझे: दी गई भाग कि इस तम मे मैं ग्राय सगा सबगीत मिले इसप्तिए कि घायल जग की पीडा था सममरे इरदील्रे मीसो को मत पहनामों हथगड़ी मेरा देई महीं सेरा है सबका हाहाकार है। कोई महीं पराया मेरा पर सारा ससार है॥मैं सिलभाता है कि जियो भो जीने दो ससार कोजितना दयादा यॉँट सको धुम वॉटो प्रपने प्यार कोहैंसो इस तरह हेंसे तुम्हारे साथ दर्सित यह घूस भीअसो एस सरह रुछस म जागे पय से कोई धूल भीसु न तुम्दारा सुख केवल जग बा भी उसमें भाग है फूस्त डाश्ष का पीछ पहसे उपबन गा ध्यगार है। कोई सहीं पराणा मरा घर सारा संसार है॥




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