न्यायप्रकाश | Nyay Prakash
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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4 MB
कुल पष्ठ :
162
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)न्याय प्रकाश -। २१
छाश झजुमान का सी-! इसी से .प्राचीनों ने इस विभाग को
नहीं कद्दा है ।
प्राचीन नेयायिकों ने इन तीन प्रकारों को न मानकर फेचलू
दो प्रकार का झनुमान ' बीत ” और “अवीत ? माना है। “ऐसी
यह चीज है “ यह जिस प्रचुमान से सबूत किया जाय उसको
“ थीत. कहते हैं । और “ ऐसी यह चीज नहीं है --यह जिससे
सबूत किया जाय उसको 'झवीत' कहते दैं.।
, अनुमान के कहने में,पांच वाक््योंक्री जरुरत होती.हैं. सो कद्द
. भागे हैं। जैसे-
, “ पंदेत में झाग है।
,/ क्योंकि यहां घूआं देख पड़ता है
० जहां धूम्मां दे वहां भाग जरूर है जैसे रसोई धर में
यहां पर धूझआं है ४ &
,.. यहां पर झाग है।
इन वाक्या में ' पर्वेत--आग-धूआं रख्तोई घर--यही चार
चीज़ों के नाम पाये गये । ( १] पबतं घद है जिस में आग का
होना सबूत फरना दे। इसको कहा है ' पक्ष ' श्र्थाद. जिस के
विपय में संदेह हों कि सबूत करनेवाली बात इस में दे या नहीं
] भाग वह चौज है जिसका होना सबूत करना दे। इस का
साम दे ' साध्य ” जिस .फो झजुमान से सिद्ध या सबूत फरना
है॥(३ ] धूझां चद्द चोज है जिस के द्वारा भाग का होता
सबूत करते हैं। इस फा नाम है ' द्ेतु ! या 'लिंग' । (४) रसोई
घर में आग झौर घूझ्ां साथ पाया जाता है इसी के दृश्ान्त रहे
पर्चत में घूम के साथ भांग का रहना सबूत करते हैं। इस को
सपक्त ' कहते ईँ । मथात् जिस में साध्य का रहना ठीक मालूम
'है.॥ इसी तरह जिस.में साध्य फा न रहना ठीक मालूम दो उस
विपक्त ' कद्दते हैं,॥
इन पा्चों अ्रवयवों में सर झोर चार पर बहुत कुछ लिंखना
झावश्यक नहीं . है.। परन्तु भनुमान का मूल है देतु इस से
इस का विचार आवश्यक्ष है | झव यहां पर यह विचार”
किया जायगा कि हेतु था लिंग क्या दे, सत् या अच्छा शुद्ध देतु
५
रड
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