समसामयिक हिन्दी - साहित्य उपलब्धियाँ | Samasamayik Hindi Sahity Upalabdhiyan

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
272
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)डॉ० विजयेद्र स्नातक१जयमारत राष्ट्रकवि के साहित्यिक
विकास का प्रतीककृष्ण दृपायन व्यास विरचित महाभारत वे घटना-सबुल एतिहासिक एवं
पौराणिक विराट आस्यान की सुपरिचित पृष्ठश्षमि पर जयभारत काय की रचना
हुई है। महाभारत क विशाल वथानक का इस रीति-मीति स काट-छांट कर सच-
धन किया गया है कि मूल क्या का आवश्यक भाग ही रशित रहा है प्रनावश्यक
विस्तार (या श्रवातर क्षेपक अ थ) छूटता गया है। क्या क त्याग भरौर ग्रहण मं
कवि न प्रमुख घरिता का प्रशुण्ण रखते हुए उन महत्त्वपूण घटनाश्रा वा ही चयन
बिया है जिनव॑ प्राधार पर कौ रवा पराइवो से सम्बद्धमहाभारत-क्या ग्राज तक ग्रथा
में ही नहीं-- अनुश्रुतिया म॑ भी जीवित है। झुछ प्रसग मर इस क्यन के श्रपवाद
हो सकते हैं, कितु उनकी स्थिति महाकाब्य के विशाल क लवर म भ्रसह्य नही है।
महामारत क विराट प्राख्यान म सकडा पौराणिक उपास्यान बतलोटल वी भाँति
समप्रधित हैं, उनका विच्छेट भोर चयन सचमुच दुप्वर है । फिर भी बहता न होगा
कि वस्तु-मम के पारसी गुप्तजी न उन सभी प्रमगा का चुनन मे झपनी प्रतिभा वा
परिचय दिया है जो प्रवघवाब्य म प्राण प्रतिष्ठा करते हैं। क्या प्रसय को सतत
ग्तिषील रसत हुए जहाँ कही कवि न सक्षेप किया है वहाँ प्रसग की भ्रीवति का
ध्यान रसा हैं विलु इस सतक्ता ने बावजू” भी कुछ स्यला पर प्रवाह म व्याघात
झा गया है। यह व्यापात पौराणित भतक याग्ा के कारण झाया है। कथा वा
प्रध्पाहार ग्रक उसकी भरविति बिठान व लिए पाठक का यति तततिक भी रक्ना
पड़े तो पह भटका उसकी रगानुमूत्ति मं वापक हागा ही ।“जयभारत' म नट्ूूप से प्रारम्भ व्रत पराड़वा के स्वर्गारोहण तय समस्त
बचानन सतालीम सर्गों (प्रवरणा ) म विभक्त है । प्रध्यक पर करण का शीपव सम्बद्ध
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