रचनानुवाद कौमुदी | Rachnanuvaad Kaumudi

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Rachnanuvaad Kaumudi by डॉ. कपिलदेव द्विवेदी आचार्य - Dr. Kapildev Dwivedi Acharya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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रास शब्द, छूट छकार, प्रथमा ह्वितीया ६ 4 अभ्यास +५ १ उदाहरण-वाक्य --१ राम गॉव को जाता है--रामः आस गच्छति। २. ग्रामम्‌ अमित. (गॉब के दोनों ओर) जल्म्‌ अस्ति | ३, ग्राग परित, (गाँव के चारो ओर) वनम्‌ अस्ति | ४ आम समया (गाव के पास) पाठ्शात्य अस्ति | ५. विद्यालय निकषा (विद्याल्य के पास) वनम्‌ अस्ति | ६ दुर्जन के लिए खेद है--हा दुर्जनम्‌ | ७. विद्यालय ग्रति (वियाल्य की ओर) गच्छति | ८, रामम्‌ अनु (राम के पीछे) गच्छति | ९ गृह गच्छति । १०, क्रोभ गच्छति | ११, जल पिबति। १२ पुस्तक पठति | २ सस्कृत बनाओ --१ बाल्क विद्याल्य को जाता है। २ बालिका विद्यालय की ओर (प्रति) जाती है। ३ कन्या फल चाहती है। ४ गुर प्रश्न पूछता है। ५, पुत्र पूल छूता है । ६ पिता सूर्य को देखता है। ७ पुत्र चन्द्रमा को चाहता है| ८, दुर्जन सजन को दु'ख देता है। ९ पुत्र गाँव के पास बेठा है। १०, विद्वान्‌ धर्म की ओर (अनु) जाता है| ११, गुरु के पास शिष्य बैठा है। १२ भिष्य समुद्र को (के विषय में) पूछता टै। १३, ससार ईश्वर को नज्नस्कार करता है। १४, हे पुत्र ! पिता कहाँ है ? १७, हे दर्जन | धर्म को क्‍यों नहीं स्मरण करता | १६ राम घर कब जाता है ? १७, फूछ के चारो ओर जल है | १८ विता धर्म की ओर जाती है। १९ विद्यालय के दोनो ओर फल ओर पल है | २० राजा दुर्जन को दु ख देता है. | ३ अशुद्धवाक्य शुद्धवाक्य तियस (१) विद्याल्ये गच्छति । विद्याल्य गच्छति । १५ (२) विद्याल्यस्य प्रति० | विद्याल्य प्रति | १४ (३) आमस्ण निकपा (समया)० । ग्राम निकपा (समया)० । १४ (४) धर्मस्य अनुगच्छति | धरमम्‌ अनुगच्छति | १४ (५) पुष्पस्य परित*० | पुष्प परित, ० १ ४ अभ्यास .--(क) २ के वाक्यो का बहुवचन बनाओ | (ख) ठुदू, इप्‌ ; स्वश्‌ , प्रच्छ , पट , लिखू , गम्‌, आगम्‌ के लग के परे रूप लिखों । (ग) राम के तुल्य १० नये शन्दों के रूप बनाओ | ७ वाक्य बनाओं.--अभित , परित', समया, निकपषा, प्रति, अनु, दच्छति, पएच्छति | ६ रिक्त स्थान भरो --१ ग्राममू जल्मस्ति। २, विद्यालय वनमरिति । ३ जनकः सत्यम गस्‍्छति। ४ त्व घनम्‌ । ५, वय प्रभ 1६, ईबरः लोक ै।




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