लिंग पुराण खंड 1 | Linga Purana Khand 1

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Read More About Shri Ram Sharma Acharya
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
502
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
जन्म:-
20 सितंबर 1911, आँवल खेड़ा , आगरा, संयुक्त प्रांत, ब्रिटिश भारत (वर्तमान उत्तर प्रदेश, भारत)
मृत्यु :-
2 जून 1990 (आयु 78 वर्ष) , हरिद्वार, भारत
अन्य नाम :-
श्री राम मत, गुरुदेव, वेदमूर्ति, आचार्य, युग ऋषि, तपोनिष्ठ, गुरुजी
आचार्य श्रीराम शर्मा जी को अखिल विश्व गायत्री परिवार (AWGP) के संस्थापक और संरक्षक के रूप में जाना जाता है |
गृहनगर :- आंवल खेड़ा , आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत
पत्नी :- भगवती देवी शर्मा
श्रीराम शर्मा (20 सितंबर 1911– 2 जून 1990) एक समाज सुधारक, एक दार्शनिक, और "ऑल वर्ल्ड गायत्री परिवार" के संस्थापक थे, जिसका मुख्यालय शांतिकुंज, हरिद्वार, भारत में है। उन्हें गायत्री प
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)मृसिक्का
शेर पुराणों मे “लिंग पुराण” एक विशेष महत्व की रचा
है । वैस तो जनसाधारण मे “शिव पुराण” का प्रयार भ्रधिक है, क्योकि
प्र प्राय कथात्पक है और श्रीतागण उसे प्रपेक्षाइत शीघ्र हृदयज्भम
कर लेते है । पर “ईनग पुराण” मे श्वैव-सिद्ध प्तो का जंसा स्पष्ट
विवेचन पाया जाता है वैत्ता श्रन्यत कम मिलता है| शिव के श्रष्यक्त
भ्रह्म-छझप वो प्तता वर उनसे ही समस्त विश्व के उद्भव वा बन
इसमे बोवगम्प शैती मे किया गया है। यही वर्णत अन्य समस्त पुराणो
में भी थोडे बहुत प्रस्तर से मिलता है पर १ई पुराशकारों में उसको
इतना विस्तृत भ्रौर जदिल बना दिया है कि समभने में बढिताई को
प्रतुभव होने लगता है । 'लिय पुराण' मे उस्ते सक्षिप्त रूप दे स्पष्टता के
साथ व्यक्त किया गया है 1
पुराण-इतों ने प्रथम प्रष्याय में हो जो प्रस्थावना वी है. उसमे
शित्र वो 'झब्द ब्रह्म' शरोर वाला वहा है। भारतीय वेदों, उपनिषदों
तथा दर्शनों मे भी सृष्टि का भारम्भ शब्द ब्रह्म' से हो जिया गया है | उत्त
प्रद्मा बा न कोई आकार है भ्ौर य रुप है । इसलिये यदि बोई उसे स्पूल
दइुप में देखने भौर रामझने को चेष्टा बरता है तो सफल नहीं हो सकता ।
पर साथ ही यह भी निश्चय है हि उनके शब्द बहा वाले स्दऋू्प को
थोड़े से उच्चक्लोटि के विद्वात्र के अतिरिक्त प्रन्य कोई समझ भी नहीं
सवता । सामान्य बुंदि के लोगो वे लिए उसे किसी ने विसी स्थूल
प्रतीक वे रूथ मे प्रतरट परना दी पडेगा । इसीलिए शिव को सुयता
“हाबद ब्रह्म वो घतु वादा बह कर साध में मह भी बह दिया है+-
चर्णावमब्यवत लक्षण वहुधां स्थितम् ॥
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