बालक अम्बेडकर | Balak Ambedkar

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Balak Ambedkar by डॉ० धर्मवीर - Dr. Dharmveer

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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जे स्कूल तक भीम के सारे कपडे भीग गए थे। उसके बालो से और कपडो से पानी टपक रहा था | इसी हालत में वह स्कूल के दरवाजे तक पहुँचा । भीम के अध्यापक का नाम पडसे था। वे एक ब्राह्मण थे और भीम को बहुत प्यार करते थे। उन्होंने भोम को इस हालत में देखकर है रानी से पूछा-- भीम, तुम इस बारिश में भीगते हुए स्कूल आए हो, क्‍या तुम्हारे पास छतरी नही थी ?* भोम असली बात को छुपा कर बो वा--मास्टर जी, हमारे घर में एफ छतरी थी और उसे मेरे वडे भाई ले आए थे । मुझे विना छतरी के ही आना पडा यह सुनकर पेडसे साहव को भीम पर बहुत तरस आया । उबका घर स्कूल के पास ही था। उनका लडका भी उसी स्कूल में पढता था। उन्होंने अपने लडबे से कहा--“जाओ, भीम को घर ले जाओ । बेचारे को ठण्ड लग रही है। नहाने के लिए गर्म पानी देना । पहनने के लिए लगोदी दे देना । इसकी घोती कमीज सूखने के लिए फंला देना । शाम को यह अपने घर चला जाएगा।” पेडसे साहय के लडके ने ऐस[ ही किया । भीम को गरम-गरम पानी में नहाना बडा अच्छा लगा। अब वह केवल लगोटी मे था । भीम आज इस बात से खश था कि वह दूसरे लडको से अपनी याजी जीत गया है। लेक्नि वह इससे भी ज्यादा इस वात से खुश था कि आज उसका स्कूल से पिड छठ गया है ! अब भीम को भस्ती की सूझी। उसके मन में इतराने की आई। उसने दूसरे लडको को नीचा दिखाना चाहा । इसके लिए वह उस नग- घडग अवस्था में स्कूल के पास टहलने गया । वह स्वूल के दूसरे लडको को यह दिखाना चाहता था कि वह क्तिने मजे मे है । भीम वहा टहल ही रहा था कि उसे पे डसे साहव ने देख लिया। उन्हे भीम पर बहुत गुस्सा आया। उन्होने उसे अन्दर बुलाया और उसी नग-धडग अवस्था मे कक्षा में बैठने को कहा । इससे भीम के मन पर बहुत जोर पडा । वह अपने किए पर पछताने लगा। आज उसने एक साथ कई गलत काम किए थे। वह पहले सिर नीचा किए शर्म से गड गया । फिर कक्षा में सबके सामने अपने अपमान की साच कर रो पडा। बालत अम्बेडकर 25




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