बिहारी सतसई | Bihari Satsaye

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Book Image : बिहारी सतसई - Bihari Satsaye
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषम वदादित की तुषा वेई कर, व्यौरनि चेई गडि गा चेई चिरजीवी श्रमर वे ठाढे वे न यहाँ नागर चेसीये जानी सगति दोष संगति सुमति न पावही सपतति केस सुदेस नर सकत न सकुचि न सकुचि सरकि सकुचि सुरत रे रक सा सखी सिल्लावति मान सघन क्‌ज, घन सघन कज छाया सुखद सटपटाति सत्तर भौह सदन सदन के सनि-कज्जल सन सुक्यी वीत्यी सब भ्रग करि सब ही तन समुहाति से सुहायेई से हसत कर समरस-समर-सकोच समै-पलट पलटे समे सम सुन्दर से रस कुसुम मडराति लस सुमिल चित पसि बदनी मोको पहुज सचिक्कनरद्द रपरे दे६५ श्द० र्‌रे9 द्भ्७ि 'इ०्हैदेश ६५७ ७सहज सेतुसहित सनेहूसही रगीलेसाजे मोहनसामा सेन सयान सायक-समसारी डारी नील की सालति हैसीतलता रस सुगन्थ सीरे जतननु३९७ सीस-'४श्रेदे३े८ भ््०्पश्श््ड २६१ १र्‌दे श्र ४२० ०३ ११६ घ्०्ट १३८ १३३० द्भ्द श्७७ इडंड छ्०्र १३७४ श्र देय हूश्रसुख सो वीती सुघर-सौति-वस सुदुति दुराईसुनि पग घुनिसुमरु भरयोसुरग महावरसुरति न तालसूर उदितसोनजुद्दी सीसोवत, जागत सपत सोवत लखिसोवत सपने स्याम घनसोहृत सग समानपद करि स्वारथ, सुकतन लम स्वेद सलिलहुसि उतारिहसि ओठतु२६३ दे५१ ०० ७१०देर् ६६२ ४१३२९६ ६६ 3५५ श्१६ र४ ३७४२०६श्र ११० शुदट 'डीई० भरेपरे१०० इद ६ शश्शु नजर द्ण्प ग्च्घइल्०




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