रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण | Ramchrita Manas Aur Balmiki Ramayana

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
18.08 MB
कुल पष्ठ :
147
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)१, रास की जन्मतिथि
चेत्रस्थ शुक्ल पक्षे तु नवस्यां श्री पुनंती ।
प्रमिजचित नाम योगेड्सो कौसत्यानंदनौडभवतत ॥।
सुर्रा०, पु, १०२नौमो तिथि सधुसास पुनोता। सुकल पच्छ झधिजित हरि प्रीता |)
नरा+ साठ, १1१९६०1१
२. लक्ष्मण-परशुराम-संवाद--
घनुरेक गुरंधते, बलमस्माकर्मुजितम् |
उपबीतं नव गुर विशिष्ट भवतां बलमस् ॥।
एशुर्रा०, पूर्व, ७८1२३देव एक गुव धनुष हमारे । नवगुत परम पुनीत तुम्हारे 1!
नारा. मा०्, १1२८१1७शक३. मधरा-प्रसंग--
संथरा सास ककेय्या दासी संदतयाधिया ।
तस्या कंठे सलिविश्य ब्राह्मी प्रति विधास्यति ।]
-ासु०रा०, दक्षिण, १४1१०नाम मंधरा संद मति, दासो कंकेई केरि ।
भ्रजस पेटारो ताहिकरि, गई गिरा मति फेरि |” *
नगरा० सा०, २1१२
४. भरत्त-पुदद-मेंट-ाइत्युक्त्वा बलवान वीर: श्यूड्बेर पुराधिप: ।
युहीत्वो पायनों दिव्यान् मह्स्थान् पाठीन रोहितान् ॥)
सॉसानि सु भांडश्च फलानि विधिधाति व |
झभ्यगाद्धरत शुर। सस्नद्ध कवचों गुहः ॥
“सुभ्रा०, दक्षिण, ८०२४-२५
प्रस कहि भेंट संजोबन लागे | कंद सुल फल खग सृग माँगे ।
सीन पोन पाठोन पुराने | भरि भरि भार कहारन्ह झाने 1]
ननराब्सा०, २१९२२, ३
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