हिंदी संत साहित्य | Hindi Sant Sahitya

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : हिंदी संत साहित्य  - Hindi Sant Sahitya
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about त्रिलोकीनारायण दीक्षित - Trilokinarayan Dikshit

Add Infomation AboutTrilokinarayan Dikshit

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
समकालीन परिस्थितियों श्३इसीलिए उन्होंने प्रेम, शान्ति, सदाचार तथा विद्ववन्धुत्व का सन्देदा जनता में प्रसारित किया | थ समाज जनता की समष्टि की दूसरी सज्ञा है । समाज का उत्थान अथवा पतन, जनता का उत्थान अथवा पतन है । समाज की उन्नति जनता की उन्नति है । जन-जीवन की प्रतिच्छाया समाज को आच्छादित करती सामाजिक है। देश की परिस्थितियों से सामाजिक परिस्थितियों का परिस्थितियाँ . निर्माण होता है । इन पॉच सौ वर्षों की अनिश्चित राजनीतिक परिस्थितियों से जन-जीवन शोषण, उत्पीडन तथा अत्याचारों की करुण गाथा वन गंया | मुहम्मद विन कासिम के आक्रमण से छेकर ईस्ट-इण्डिया कम्पनी के सस्थापन तक भारतीय जीवन निरन्तर उत्पीडित होता रहा । अतः इन पॉच सो वर्षों मे भारत की सामाजिक परिस्थितियाँ भी गोचनीय रही | सव्तनत-काल में शासकों की इच्छा ही सर्वोपरि थी । हिन्दुओ का अस्तित्व उस समय भी सुरक्षित न था । अत्याचारों तथा उत्पीडन के नैराश्य ने हिन्दुओ के धार्मिक विदवास की जड़ों को हिला दिया । हिन्दू और मुसलमान कभी एक न द्दो सके क्योंकि उनके सिद्धान्तों में भेद था । इसलिए समाज दो वर्गों में विभाजित था--(१, मुसलमानी-समाज, (२) हिन्दू-समाज | मध्य-युग में विलासिता का राज्य था | प्रजा की श्रम से अर्जित कमाई सुल्तानों तथा अमीरों के ठाठ-बाट तथा चिलास पर व्यय होती थी । प्रजा का हितेषी कोई भी ने था । प्रजा पूर्णतया उपेक्षित तथा दरि- मुसखलमानी- द्रता से अभिगस जीवन व्यतीत कर रही थी । योग्य मुस॒ल- समाज... मान शासक-वर्ग मे मिल जाते थे तथा साधारण मुसलमानों के लिए खानकाद्द खुले थे जिनमें उनके देठ॒ भोजन की व्यवस्था थी । इसलिए सुसलमानों को कुछ भी परिश्रम अथवा व्यवसाय नहीं करना पड़ता था । विलासिता मुस्लिम-समाज की अभिन्न अग बन गई थी | मध्य-युग असमानता का समय था । सन्नी तथा शिया मुसलमानों में धार्मिक एवं सामाजिक मेद था । मुसलमानों मे दास-प्रथा का प्रचलन था 1 अनेक दासो का क्रप-विक्रय प्रतिवर्ष होता रहता था । राजकीय दढासो की संख्या बहुत अधिक थी । जिस व्यक्ति के पास अधिक दास होते थे, वह अधिक धनी व्यक्ति माना जाता था । दासो की दया अति शोचनीय थी । दासियों को तो काम-क्रीडा का साधन भी बनाया जाता था । व्यमिचार का बोलवाला था | इस युग से हरम में अधिक-से-अधिक सुन्दरियो को रखने का म्रचलन था |




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now