राजस्थानी | Rajasthani

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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राजस्थानी भाषा भौर सादिस्य1३) गूजरी-यद विशेषत्तः दिमालयकी तराईमें मसे हुछे गूजरों, थद्दीरों शादिकी चोलियोका समृद दे ।(३) भीली-यदद गुज्नराती भर राजस्थानीके बीचकी मिश्रित भाषा है ।( ४ पहाड़ी वर्गकी भाषामे-- इनका राजर्थानीके साथ घनिष्ठ सम्बन्ध दै। इनमें प्रमु्त नेपाली, कुमाउनी, गढ़वाली आदि हैं। नेपाढी नेपालके गोरबॉकी भाषा है जो राजस्थानसे जाकर चहदीँ बसे थे।( ४) भारतीय ससियों या जिप्सियों (दफएभ९५ की योलियोका संबंध भी राजस्थानीसे दै। इनके पदाड़ी. भामटी, बैलदारो, भोडकी, लाढी, मद्रिया, साँसी, फंजरी, नटी, होमी भादि अनेक मेद-प्रमेद हैं ।राज्स्थानीकी चारों शायाभोंमें विस्तार भर मादिय दोनों दो दृष्रियीसि पश्चिमी राजस्थानी या मारवाड़ी विशेष महरवपूर्ण दै । शुजराती प्राचोन पश्चिमी राजस्थानीसे हो विकसित हुई है। राज्स्थानीका प्राय: समस्त साहित्य इसी पश्चिमी राजस्थानीमें, या यों 'कदिये दसकी प्रमुख उपशाखा जोधपुरीमें, छिसा गया है' । हिंगलका मूदाघार मो यह पश्चिमी राजस्थानी हो दै। राजश्यामीकी दूसरी शायाओ में छोक-साहित्यके भतिरिक्त अन्य सादिय नाम-मात्रको, सहींके यरापर, है ।१. बसमान दाताइई' में परिचसी हाजरद नोइ से दूसरी इस इस अ्दौदो बलोमें भा बुछ चाद्स्य लिखा गएा टै । ११न*च




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